By Healthy Nuskhe | Oct 19, 2026
मेनोपॉज महिलाओं की जिंदगी का एक सामान्य पड़वा होता है। इस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कई बार व्यवहार और मूड को प्रभावित करता है। कुछ महिलाओं को इस दौरान बिना किसी कारण बेचैनी, उदासी, चिड़चिड़ापन या बार-बार परेशान महसूस होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं कई बार महिलाओं को खुद नहीं समझ आता है कि आखिर वह छोटी-छोटी बातों में इतना क्यों परेशान हो रही हैं। तो वहीं कई महिलाएं खुद से ही परेशान महसूस करने लगती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह से हार्मोन्स महिलाओं के मूड को प्रभावित करते हैं और इस दौरान महिलाएं अपना कैसे ध्यान रखें।
मेनोपॉज के आसपास शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स के लेवल में उतार-चढ़ाव होने लगता है। एस्ट्रोजन का संबंध सिर्फ फर्टिलिटी से नहीं बल्कि दिमाग में मूड को कंट्रोल करने वाले कई केमिकल्स और प्रोसेस को प्रभावित करता है। एस्ट्रोजन के लेवल में होने वाले इस बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं को चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, बेचैनी या भावनात्मक उतार-चढ़ाव ज्यादा महसूस हो सकते हैं। लेकिन इसका असर हर महिला में एक जैसा नहीं होता है।
मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेज, नींद में परेशानी, रात में पसीना आना और थकान जैसी समस्याएं होना आम बात है। इस दौरान कई महिलाओं को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है और कई बार वह बिना बड़ी वजह के रोने लगती हैं। हर बार समस्या सिर्फ हार्मोन्स की नहीं होती है, बल्कि खराब नींद, हार्मोनल बदलाव, रोजमर्रा का तनाव और थकान आदि मिलकर मूड को प्रभावित कर सकती हैं।
इसको समझना बेहद जरूरी है। जिसको अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या फिर महिलाएं इसके बारे में किसी से बात नहीं कर पाती हैं। लेकिन मेनोपॉज के दौरान कई महिलाएं खुद से परेशान रहती लगती हैं।
इसके पीछे सिर्फ हार्मोनल इंबैलेंस नहीं होता है। इस समय पर कई बार महिलाओं को सही इमोशनल सपोर्ट नहीं मिल पाता है।
महिलाओं के चिड़चिड़ेपन, मूड स्विंग्स या परेशानी को समझने की जगह उनके बच्चे, पार्टनर या फैमिली के अन्य लोग ऐसा महसूस कराने लगते हैं कि वह अपनी जिम्मेदारियों को ठीक तरीके से निभा नहीं पा रही हैं या वह हर बार पर ओवररिएक्ट करने लगी हैं।
मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाएं शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर भी असहज महसूस कर सकती हैं। स्किन, वेट और बालों में बदलाव, पीरियड्स का अनियमित होना या इंटिमेट लाइफ से जुड़े कुछ बदलाव भी महिलाओं को परेशान करते हैं।
ऐसे में महिलाओं को लग सकता है कि अब वह पहले जैसी नहीं रही हैं। वहीं महिलाओं को यह भावना कई बार बेचैनी या मूड खराब करने का कारण कर सकती हैं।
दरअसल, चिड़चिड़ापन, हर तरह की उदासी या फिर चिंता को मेनोपॉज से जोड़ना सही नहीं है। अगर आपका लगातार मूड खराब रहता है, अधिक चिंता रहती है, किसी काम में मन नहीं लगता, नींद और रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। तो आपको डॉक्टर या फिर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना चाहिए।