By Healthy Nuskhe | Sep 29, 2026
आजकल शादी-ब्याह, पार्टी, धार्मिक कार्यक्रम या फिर किसी भी बड़े आयोजन में डीजे आदि बजना एक आम बात हो गई है। वहीं इसको मनोरंजन का हिस्सा माना जाता है। स्पीकर की तेज बीट पर डांस करना लोगों के लिए किसी रोमांच से कम नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके लिए यह रोमांचक एक्टिविटी जानलेवा साबित हो सकती है। बता दें कि तेज आवाज और डीजे के कारण हार्ट अटैक के कई मामले देखने को मिले हैं। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो बहुत तेज आवाज अचानक से बीपी बढ़ा सकता है। वहीं अगर बीपी बहुत ज्यादा हाई हो जाता है, तो हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक आने का जोखिम हो सकता है, जिससे मौत होने का भी खतरा रहता है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो डीजे की तेज आवाज को दिल का दौरा पड़ने का प्रमुख कारण माना जा सकता है। जिन लोगों का हार्ट कमजोर है, उनको इस तरह के तेज आवाज से दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि कम उम्र के लोगों में इस तरह की दिक्कतें होना हैरान करने वाला है।
सीधे तौर पर डीजे हार्ट अटैक की वजह नहीं है। लेकिन यह हाई बीपी की समस्याओं को बढ़ा देता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने और मौत का जोखिम भी हो सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो तेज आवाज शरीर में तनाव पैदा करती है। शरीर का सिपैंथिक नर्वस सिस्टम शोर सुनते ही सक्रिय हो जाता है और स्ट्रेस हार्मोन का स्त्राव बढ़ जाता है और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। वहीं तेज आवाज में रहने से कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
इसका यह बिलकुल भी मतलब नहीं है कि डीजे की तेज आवाज सुनते ही हार्ट अटैक आ जाएगा या फिर जान चली जाएगी।
बहुत तेज या लगातार होने वाला शोर आपके शरीर पर ऐसा तनाव डाल सकता है, जो पहले से हाई बीपी, हृदय रोग और अन्य जोखिमों से परेशान व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकता है।
एक अध्ययन में पाया गया है कि बढ़ता शोर आपके हार्ट की रिदम की लय को बिगाड़ देती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एट्रियल फिब्रिलेशन कहा जाता है।
इस स्थिति में दिल के धड़कन की अनियमितता बढ़ जाती है। जिसकी वजह से स्ट्रोक, रक्त के थक्के बनने और हार्ट फेलियर की समस्या हो सकती है।
अध्ययनकर्ताओं की मानें, तो ऐसी कोई भी चीज जो हमारे हार्ट पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है या फिर ब्लड प्रेशर में बदलाव की वजह बनती है। जिसकी वजह से फिब्रिलेशन ट्रिगर हो सकता है।
लाउडस्पीकर/डीजे की तेज आवाज को हमेशा से नुकसानदायक माना जाता रहा है। यह न सिर्फ हृदय रोगियों के लिए गंभीर होता है, बल्कि हेल्दी लोगों में भी हृदय संबंधी समस्याओं की वजह बन सकता है।
WHO के मुताबिक 70 डेसिबल की आवाज हमारे लिए सहनीय है। इस आवाज के संपर्क में भले ही कितनी देर तक रहें, इससे नुकसान नहीं होता है। कूलर और वाशिंग मशीन जैसे उपकरणों में 70 डेसिबल की आवाज होती है।
वहीं 85 डीबी से ज्यादा के शोर में 8 घंटे से ज्यादा रहना खतरनाक हो सकता है। यह यातायात या मिक्सर की आवाज के बराबर होता है।
अगर 90-100 डेसिबल की आवाज को गंभीर माना जाता है। वहीं शादियों और पार्टियों आदि में जो डीजे बचता है, उसकी आवाज 100 डीबी से ज्यादा होती है।