By Healthy Nuskhe | Nov 03, 2026
भारत में कोई भी पर्व हो या त्योहार हो, उसकी रौनक देखते ही बनती है। काजू-कतली, लड्डू, गुलाब जामुन जैसे तरह-तरह के पकवानों से पूरा घर महक उठता है। मेल-जोल के इस माहौल में अक्सर हम सभी तली-भुनी चीजों और मिठाइयों का खूब मजा लेते हैं। लेकिन इन सबके बीच में हम एक जरूरी काम भूल जाते हैं, जोकि शरीर को हाइड्रेटेड रखना और सही मात्रा में पानी पीना है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पथरी कैसे बनती है और किन संकेतों को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए।
त्योहारों के मौके पर अगर आप थोड़ा बहुत मीठा खा लेते हैं, तो कोई परेशानी की बात नहीं है। लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है, जब आप कम पानी पीते हैं और नमक, चीनी या मीठे ड्रिंक्स का सेवन बढ़ा देते हैं। इससे किडनी स्टोन का जोखिम काफी बढ़ जाता है। खासकर उन लोगों में जिनको पहले यह समस्या हो चुकी है।
दरअसल, जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो पेशाब में मौजूद मिनरल्स और नमक गाढ़े होकर हार्ड क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं और यह पथरी बन जाते हैं। खराब डाइट और पानी की कमी के अलावा डायबिटीज, जेनेटिक्स या गाउट जैसी बीमारियों भी इसकी जिम्मेदार होती हैं।
पेशाब से तेज बदबू आना या ब्लड आना।
पेशाब करते समय भयंकर दर्द या जलन महसूस होना।
दर्द के साथ जी घबराना या उल्टी महसूस होना।
यूरिन की समस्या के साथ तेज फीवर होना।
अगर दर्द के साथ-साथ फीवर और उल्टी महसूस हो, तो बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
रोजाना दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। इसका अच्छा पैमाना यह है कि आपके पेशाब का रंग हल्का पीला होना चाहिए।
दिन भर मिठाइयां खाने की जगह पूरा दिन एक या दो छोटे मिठाई के टुकड़े खाएं।
रोजाना अपनी डाइट में करीब 400 ग्राम ताजे फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इससे आपके शरीर को फाइबर मिलेगा और पेट भी हल्का रहेगा।
रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक करें। या फिर हल्की-फुल्की कसरत जरूर करें। रात को भारी खाना खाने के बाद टहलना एक बेहतरीन ऑप्शन है।
किसी भी तरह के दर्द में पेनकिलर के भरोसे बैठें। क्योंकि ऐसा आपको चेकअप के समय बड़ी मुसीबत से बचा सकता है।
अगर दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए या फिर एक दिन से ज्यादा टिके, तो आपको मेडिकल सहायता लेना चाहिए। हालांकि डॉक्टर शुरूआत में पेशाब और ब्ल्ड की जांच करते हैं। जिससे कि किडनी की स्थिति या फिर इंफेक्शन का पता चल सका। वहीं जरूरत होने पर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन भी किया जाता है। जिससे पथरी के सटीक आकार, जगह और ब्लॉकेज का पता चल जाता है।
इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को कितना बड़ी पथरी है। अगर पथरी छोटी है, तो उसको ज्यादा पानी पीना चाहिए और साधारण दवाओं से यह खुद ही बाहर निकल जाती है। लेकिन अगर पथरी बड़ी है, तो पेशाब का रास्ता रुक जाता है या बहुत ज्यादा दर्द है। तो इसको एंडोस्कोपिक सर्जरी या 'शॉक-वेव लिथोट्रिप्सी' के जरिए बाहर निकाला जाता है।
फेस्टिवल का मतलब है कि अपनों के साथ खुशियां मनाना है। न कि हॉस्पिटल के चक्कर काटना। बस थोड़ा सा ध्यान रखकर, खूब पानी पिएं और शरीर के शुरूआती संकेतों को समझकर आसानी से किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन लगातार दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।