किडनी को फिट और हेल्दी रखने के लिए रोजाना करें ये 3 योगासन


किडनी को फिट और हेल्दी रखने के लिए रोजाना करें ये 3 योगासन

किडनी हमारे शरीर का एक अहम अंग है और इसके बिना हमारे शरीर के काम करने की क्षमता ना के बराबर हो जाती है। किडनी हमारे शरीर में बनने वाले जहरीले पदार्थों को फिल्टर करके यूरिन के जरिए बाहर निकालती है। अगर किडनी सही ढंग से काम ना करे तो हमारे शरीर में टॉक्सिंस जमा होने लगेंगे जिसका सीधा असर हमारे दिल और लिवर पर पड़ेगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोटापे से ग्रस्त लोगों को किडनी की समस्या होने का जोखिम अधिक रहता है। ऐसे में आपको अपने खानपान और जीवनशैली पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। आप योग के नियमित अभ्यास से किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं। आज के इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे योगासन बताएंगे जो किडनी को स्वस्थ रखने के लिए फायदेमंद हैं - 


मार्जरीआसन

इस आसन को करने के लिए वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को फर्श पर आगे की ओर रखें। अपने दोनों हाथों पर थोड़ा सा भार डालते हुए अपने हिप्स (कूल्हों) को ऊपर उठायें। अपनी जांघों को ऊपर की ओर सीधा करके पैर के घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनाएँ। अब साँस भरते हुए अपने सिर को पीछे की ओर झुकाएं, अपनी नाभि को नीचे से ऊपर की तरफ धकेलें और टेलबोन (रीढ़ की हड्डी का निचला भाग)) को ऊपर उठाएं। अब अपनी सांस को बाहर छोड़ते हुए अपने सिर को नीचे की ओर झुकाएं और मुंह की ठुड्डी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। इस स्थिति में अपने घुटनों के बीच की दूरी को देखें। अब फिर से अपने सिर को पीछे की ओर करें और इस प्रक्रिया को दोहराहएं। इस क्रिया को आप 10-20 बार दोहराएं।


सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़)

इस आसान को करने के लिए ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएं। अब हाथ को शरीर से सटा कर और हथेलियों को ज़मीन से लगा कर रखें। फिर धीरे-धीरे नितंबों, कमर और पीठ के सबसे ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं। इस अवस्‍था में 3 से 5 मिनट तक रहें। सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं।


अर्ध मत्स्येन्द्रासन

इस आसन को करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं और अपने पैरों को सामने फैलाएं। अपनी रीढ़ को सीधा रखें और अपने हाथों को साइड में रखें। अब अपने बाएं घुटने को मोड़ें और अपने बाएं पैर को क्रास्ड लेग पोजीशन की तरह पेल्विक क्षेत्र के पास लाएं। अपने दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बाएं घुटने के ऊपर ले आएं। आपका दाहिना पैर आपके बाएं घुटने के पास होना चाहिए। अब, अपने ऊपरी शरीर को मोड़ें और अपने बाएं हाथ को अपने दाहिने घुटने के पार ले आएं। आप अपने दाहिने हाथ को अपनी तरफ या अपनी पीठ के पीछे रख सकते हैं। लगभग एक मिनट के लिए इस स्थिति में रहें और फिर प्रारंभिक स्थित में लौट आएं। अब इसे दूसरी तरफ से दोहराएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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