सर्वाइकल पेन से छुटकारा पाना के लिए करें ये योगासन


सर्वाइकल पेन से छुटकारा पाना के लिए करें ये योगासन

आज के समय में ज्यादातर लोग डेस्क जॉब करते हैं। ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने से बड़ी तादाद में लोग सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या से जूझ रहे हैं। गलत पोस्टर या कम शारीरिक मेहनत की वजह से सर्वाइकल पेन शुरू हो जाता है। कुछ लोग इस दर्द से निपटने के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं। वहीं कुछ लोग इसे टाल देते हैं जिसकी वजह से यह दर्द धीरे-धीरे और बढ़ जाता है। ऐसे में आप योग से सर्वाइकल पेन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आज के इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे योगासन बताने जा रहे हैं जिनसे सर्वाइकल पेन से निजात पाने में मदद मिलती है -  


भुजंगासन 

इस आसान को करने के लिए ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ। अब अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं। उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहे। अब बाद सांस  छोड़ते हुए, अपने पेट, छाती और फिर सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं।


सालंब भुजंगासन  (स्फिंक्स मुद्रा)

इस आसान को करने के लिए ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ।अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहे। अब बाद सांस  छोड़ते हुए, अपने पेट, छाती और फिर सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं।


बालासन 

इस आसान को करने के लिए सबसे पहले ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। ध्यान रखें कि आपके घुटने आपस में सटे हुए और पैर नितम्बों के ऊपर टिके हुए हों। अब शरीर को आगे की ओर झुकाते हुए, धीरे-धीरे सिर ज़मीन से लगाएं। अब दोनों हाथों को सिर से लगाते हुए आगे की ओर सीधा रखें और हथेलियों को ज़मीन से लगाएं। इस अवस्था में कम से कम 30 सेकेंड तक रहें। इस आसान को 4-5 बार दोहराएँ। 


गौमुखासन 

इस आसान को करने के लिए आराम से बैठने की स्थिति में आ जाएं। अब अपनी बाईं कोहनी को ऊपर उठाएं और अपनी बांह को मोड़ें ताकि आपका हाथ आपकी पीठ पर आ जाए। अब अपनी बाईं कोहनी को धीरे से दाईं ओर खींचने के लिए अपने दाहिने हाथ का उपयोग करें। इस मुद्रा में 30 सेकेंड तक रहें। फिर इसे दूसरी तरफ से करें।


उष्ट्रासन

इस आसन में ऊंट की मुद्रा बनाई जाती है और शरीर को पीछे की तरफ झुकाया जाता है। इस आसान को करने के लिए जमीन पर घुटने के बल बैठ जाएं और दोनों हाथों को कूल्हों पर रखें। ध्यान रखें कि आपके घुटने कंधों के समानांतर हों और पैरों के तलवे छत की तरफ हों। अब सांस को अंदर लें और रीढ़ की निचली हड्डी को आगे की तरफ जाने का दबाव डालें। इस दौरान पूरा दबाव नाभि पर महसूस होना चाहिए। इसे करने के दौरान अपनी कमर को पीछे की तरफ मोड़ें। अब धीरे-धीरे हथेलियों की पकड़ पैरों पर मजबूत बनाएं और  अपनी गर्दन को ढीला छोड़ दें। गर्दन पर बिल्कुल भी तनाव न दें। इस अवस्था में 30 से 60 सेकेंड तक रहें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पुरानी अवस्था में वापस लौट आएं। 


नटराज आसान 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले खड़े हो जाएं। उसके बाद पंजों को एक साथ रखें और आंखों की सीध में किसी पॉइंट पर दृष्टि केंद्रित करें। उसके बाद दाएं घुटने को मोड़ें और शरीर के पीछे दाहिने हाथ से टखने को पकड़ लें। अब दोनों घुटनों को एक साथ रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश करें। उसके बाद धीरे-धीरे दाहिने पैर को उठाते हुए पीछे की ओर तानें और जितना संभव हो ऊंचा उठायें। यह पता कर लें कि दायां कुल्हा बिल्कुल भी ना मुड़े और पैर शरीर के ठीक पीछे ऊपर की ओर उठें। बाएं हाथ की तर्जनी के आगे वाले भाग और अंगूठे को ज्ञान मुद्रा में लाकर बाएं हाथ को शरीर के सामने ऊपर तरफ उठायें। साथ ही अपनी दोनों आंखों को बाएं हाथ पर केंद्रित करें। अपनी इच्छा अनुसार इस अवस्था को बनाये रखें। साथ ही बाएं हाथ को एक साथ रखें।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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