जानिए ऐसे 3 आसान योग जिनको रोजाना करने से पेट की चर्बी को जल्द कर सकेंगे कम


जानिए ऐसे 3 आसान योग जिनको रोजाना करने से पेट की चर्बी को जल्द कर सकेंगे कम

सेहत की चिंता हर किसी को होती है। कहते हैं कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। आज के आधुनिक युग में स्वस्थ सेहत के लिए पर्याप्त समय न देने के कारण अक्सर सेहत बिगड़ती जाती है। लोगों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि क्या योगा हमारे बैली फैट (पेट की चरभी) को कम कर सकता है? पेट की चर्बी बढ़ने से एक स्वस्थ और सुन्दर शरीर भी अच्छी नहीं लगती है। योगा हमारे मन को शांत करने के साथ-साथ हमारे बैली फैट को भी कम करता है।


ध्यान रखने योग्य बात है कि भले ही शरीर का वजन बहुत जल्द कम किया हो, लेकिन बैली फैट को घटाने के लिए आपको दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है।बहुत से लोग पेट की चर्बी कम करने की दवा इस्तेमाल करते है, लेकिन ये आपकी हैल्थ के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित होता है। कमर और पेट कम करने के उपाय आपको बहुत आसानी से मिल जाएंगे, लेकिन पेट की चर्बी कैसे घटाए इसका सही उपाय आसानी से नहीं मिल पाता है। इसके लिए सही आहार और व्यायाम की बहुत आवश्यकता है। इस कोरोना काल में आप जिम तो नहीं जा सकते तो आइये हम आपको ऐसे ही 3 योगासनों के बारे में बताते है, जिससे आपके शरीर की वसा और वजन तेजी से कम किया जा सकता है।


नौकासन

नौकासन चेहरे की चमक बढ़ाने के साथ-साथ आपके पेट पर जमे फैट को भी कम करता है। यह लाभकारी योग वजन कम करने में भी सहायता करता है।


इसको करने की विधि 

नौकासन योग करने के लिए आपको एक गहरी लम्बी सांस लेना है। और अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सिर छाती और हाथों को ऊपर उठाना है। ध्यान रहे कि आपके हाथ आपके जांघ के ठीक ऊपर होने चाहिए। पैर को सीधा रखना है और घुटने नहीं मोड़ने चाहिए। शुरुआत में सिर और पैर को आप 20 से 30 डिग्री के एंगल तक ऊपर उठाए। आपकी आँखो, हाथों की उंगलियां और पैरों की उंगलिया एक लाइन में रहनी चाहिए और आप अपने पेट में हो रहे खिंचाव को महसूस करे। शरीर का पूरा वजन हिप्स के ऊपरकरे औरअपने क्षमतानुसार इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक अवश्य रहे और धीरे-धीरे सांस लेते छोड़ते रहे। इसे आपको  2 से 5 बार दोहराना है। 


नौकासन के फायदे

1) नौकासन करने से कब्‍ज जैसी समस्‍याएं दूर रखता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

2) इस आसन से पैरों की ढ़ीली हो चुकी त्‍वचा में कसाव लाया जा सकता है।

3) नौकासन पेट की मासपेशियों को भी बहुत मजबूत बनाता है।


भुजंगासन

यह योगासन बैली फैट को कम करने में बहुत सहायक होता है।


भुजंगासन करने की विधि

इसके लिए सबसे पहले आप पेट के बल जमीन पर लेट जाएं और अपनी दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें। ध्यान रखें कि आपके टखने (ऐनकल) एक-दूसरे से दूर रहें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और दोनों हथेलियों को फर्श की तरफ करें। अब अपने शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचें और अपने सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचें। ध्यान दें कि इस वक्त तक आपकी कुहनी मुड़ी हुई है। इसके बाद अपने सिर को पीछे की तरफ खीचें और साथ ही अपनी छाती को भी आगे की तरफ निकालें। इसके बाद अपने हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बढ़ाएं। शरीर को इस स्थिति में करीब 15 से 30 सेकेंड तक रखें और फिर रिलेक्स हो जाए। ये अभ्यास आपको लगातार 2 मिनट तक करना है। 


भुजंगासन के फायदे

1) कंधों और बाजुओं के लिए भुजंगासन फायदेमंद होता है।

2) कमर के आसपास का मोटापा कम करने में भी भुजंगासन सहायक होता है।

3) इससे कमर और पीठ दर्द की समस्या से आसाम मिलता है।

4) इस आसन के अभ्यास से पेट के आसपास जमी फैट कम होती है।

5) भुजंगासन पेट के सभी अंगों जैसे लीवर, गुर्दे वगैरह को सही रखने में सहायक होता है।

6) नियमित रूप से भुजंगासन करने से भूख बढ़ती है और कब्ज की समस्‍या भी दूर रहती है।


उष्ट्रासन

पेट से फैट (वसा) को घटाने के लिए उष्ट्रासन बहुत सहायक होती है। यह टम्मी को स्लीम बनाने में मदद करती है।


उष्ट्रासन करने की विधि

उष्ट्रासन करने के लिए सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें, पंजे पीछे की ओर हों तथा फर्श पर जमे हों।घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी रखें। अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें। अंतिम मुद्रा में आपको जांघें फर्श से समकोण बनाती हुई होगी और सिर पीछे की ओर झुका होगा। शरीर का वजन बांहों तथा पांवों पर समान रूप से होना चाहिए। फिर धीरे-धीरे सांस ले और धीरे-धीरे सांस छोङे। इसी तरह से आप इस आसन को पांच से सात बार कर सकते है।


उष्ट्रासन के फायदे

1) उष्ट्रासन पेट और कमर को लचीला बनता है।

2) महिलाओं में मासिक से जुड़ी परेशानियों (पीरिअड्स) में भी यह मदद करता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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