सिर्फ महिलाओं को नहीं, पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, बचाव के लिए करें ये योगासन


सिर्फ महिलाओं को नहीं, पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, बचाव के लिए करें ये योगासन

आजकल गलत खानपान और जीवनशैली के कारण बहुत सी गंभीर बीमारियॉं आम हो गई हैं। आज के समय में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर का प्रकार है। रिकॉर्ड्स के मुताबिक भारत में हर 8 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर का शिकार है। ब्रेस्ट कैंसर को महिलाओं की बीमारी माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरूआती लक्षण भी बहुत आम से दिखते हैं लेकिन यदि सही समय पर इन्हें पहचानकर इलाज न करवाया जाए तो यह घातक साबित हो सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के सही खानपान और जीवनशैली बहुत जरुरी है। नियमित योग से आप ब्रेस्ट कैंसर से बचाव कर सकते हैं। आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए आपको कौन से योगासन करने चाहिए - 


गौमुखासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पालथी लगाकर बैठ जाएं। अब अपने बाएँ पैर को एड़ी के पास से अपनी तरफ खींचते हुए इस तरह रखें कि आपके पैर की एड़ी और दाईं तरफ का हिप आपस में टच हो जाएं। अब दाएं पैर को उठाते हुए बाएं पैर के ऊपर इसी तरह रखें, जैसे बायां पैर रखा हुआ है। इस अवस्था में आपके दोनों पैर के घुटने एक के ऊपर एक होने चाहिए। अब आपका जो पैर नीचे है, उस तरफ का हाथ ऊपर उठाइए और पीठ के पीछे की तरफ ले जाएं। अब दूसरा हाथ नीचे की तरफ से पीठ के पीछे की तरफ लेकर जाएं। पीठ के पीछे इन दोनों हाथों को आपस में उंगलियों की मदद से पकड़ने का प्रयास करें। अब इस प्रक्रिया को बाएं पैर को उठाते हुए दाएं पैर के ऊपर रखें और पूरी प्रक्रिया दोहराएं। इस आसान को 4 से 5 बार करें।


मकरासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब अपने सिर और कंधों को ऊपर उठाएं और हथेलियों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद रीढ़ की हड्डी में अधिक मोड़ लाने के लिए कोहनियों को एक साथ रखें। ध्यान दें कि अगर आपकी गर्दन पर ज्यादा दबाव हो तो कोहनियों को थोड़ा अलग कर लें। सही तरह की स्थिति में आने के बाद अपने पूरे शरीर को शिथिल करें और आंखें बंद करके लेट जाएँ।


धनुरासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब अपने सिर और कंधों को ऊपर उठाएं और हथेलियों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद रीढ़ की हड्डी में अधिक मोड़ लाने के लिए कोहनियों को एक साथ रखें। ध्यान दें कि अगर आपकी गर्दन पर ज्यादा दबाव हो तो कोहनियों को थोड़ा अलग कर लें। सही तरह की स्थिति में आने के बाद अपने पूरे शरीर को शिथिल करें और आंखें बंद करके लेट जाएँ।


अर्ध मत्स्येन्द्रासन

इस आसन को करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं और अपने पैरों को सामने फैलाएं। अपनी रीढ़ को सीधा रखें और अपने हाथों को साइड में रखें। अब अपने बाएं घुटने को मोड़ें और अपने बाएं पैर को क्रॉस्ड लेग पोजीशन की तरह पेल्विक क्षेत्र के पास लाएं। अपने दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बाएं घुटने के ऊपर ले आएं। आपका दाहिना पैर आपके बाएं घुटने के पास होना चाहिए। अब, अपने ऊपरी शरीर को मोड़ें और अपने बाएं हाथ को अपने दाहिने घुटने के पार ले आएं। आप अपने दाहिने हाथ को अपनी तरफ या अपनी पीठ के पीछे रख सकते हैं। लगभग एक मिनट के लिए इस स्थिति में रहें और फिर प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं। अब इसे दूसरी तरफ से दोहराएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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