डिप्रेशन की बीमारी में रामबाण हैं ये 5 योगासन, नहीं लेनी पड़ेगी कोई दवाई


डिप्रेशन की बीमारी में रामबाण हैं ये 5 योगासन, नहीं लेनी पड़ेगी कोई दवाई

आजकल की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। आजकल हर कोई जीवन में आगे बढ़ने की होड़ में लगा हुआ है। जीवन में पैसे कमाने और सफलता पाने के चक्कर में हम अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। बड़े ही नहीं युवा और बच्चे भी डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। नियमित योग से डिप्रेशन की बीमारी से बचाव किया जा सकता है। योग ना केवल हमारे शारीरक, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। आज के इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे योगासन बताएंगे जिससे आपका मन शांत होगा और आपको डिप्रेशन से छुटकारा मिलेगा -  


बालासन

बालासन के नियमित अभ्यास से डिप्रेशन की समस्या में लाभ होता है। इस आसान को करने के लिए सबसे पहले ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। ध्यान रखें कि आपके घुटने आपस में सटे हुए और पैर नितम्बों के ऊपर टिके हुए हों। अब शरीर को आगे की ओर झुकाते हुए, धीरे-धीरे सिर ज़मीन से लगाएं। अब दोनों हाथों को सिर से लगाते हुए आगे की ओर सीधा रखें और हथेलियों को ज़मीन से लगाएं। इस अवस्था में कम से कम 30 सेकेंड तक रहें। इस आसान को 4-5 बार दोहराएँ। 


सालंब भुजंगासन  (स्फिंक्स मुद्रा)

डिप्रेशन की बीमारी में भुजंगासन का अभ्यास फायदेमंद माना जाता है। ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ।अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं, और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में ३० सेकंड तक रहे। अब बाद सांस  छोड़ते हुए, अपने पेट, छाती और फिर सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं।

 

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उत्तानासन

ज़मीन पर सीधे खड़े हों जाएं और अपने हाथ अपने शरीर के साइड में रखें। साँस छोड़ते हुए कूल्हे के जोड़ों से झुकें और नीचे झुकते समय साँस छोड़ें।इस स्तिथि में अपने घुटनों को सीधा रखें। लेकिन अगर आप यह नहीं कर पा रहे हों तो अपने घुटनों को थोडा सा मोड़ लीजिये। लेकिन ध्यान रहे कि आपके टखने बिलकुल सीधे होने चाहिए। अब अपने शरीर को थोडा सा स्ट्रेच करे और कोशिश करें की आपका सीना और पेट आपके पैर की जांघो से चिपका हुआ रहे। इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें। अब अपने नितम्बों  को ऊपर की ओर उठाएं और अपने हाथो को ज़मीन से लगाने की कोशिश करें। इस अवस्था में 30 सेकंड्स से 1 मिनट तक रह सकते हैं। सांस अंदर लेते हुए पहले की अवस्था में वापिस आ जाएं।


सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़)

ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएं। हाथ को शरीर से सटा कर और हथेलियों को ज़मीन से लगा कर रखें। फिर धीरे-धीरे नितंबों, कमर और पीठ के सबसे ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाएं। इस अवस्‍था में 3 से 5 मिनट तक रहें। सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं।


शवासन

ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच में थोड़ी दूरी रखें और हाथों को बगल में सीधा रखें। हथेलियों को ऊपर की ओर रखें और शरीर को ढ़ीला छोड़ दें। आंखों को बंद कर लें। सांस को सामान्य ही रखें और अपना पूरा ध्यान अब अपनी सांसों पर केंद्रित करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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