गर्भावस्था में नींद है जरूरी, सोते समय इन बातों का खास ध्यान रखें


गर्भावस्था में नींद है जरूरी, सोते समय इन बातों का खास ध्यान रखें

गर्भवती होना एक अनोखा अनुभव है और यह आपको बेहद रोमांचित करता है। यह एक ऐसा समय भी होता है, जब महिला का शरीर बह अनेक बदलावों से गुजरता है। इन बदलावों के कारण आपकी नींद भी प्रभावित होती है।

 

अगर आप पहले भी गर्भवती रह चुकी हैं तो आपको इसका अहसास हो चुका होगा, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इस बार के शारीरिक बदलाव पहले जैसे ही हों। आज हम आपको बताने वाले हैं कि गर्भावस्था के दौरान अनिद्रा की समस्या क्यों होती है और आप अपनी गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान रात में अच्छी तरह आराम व नींद कैसे प्राप्त कर सकती हैं।


नींद की समस्या

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सबसे अधिक कठिनाई का अनुभव सोने में ही होता है। वैसे गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण इनका कारण होते हैं और इन्हें समझने से आपको अपनी नींद को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है। इस समय नींद के पैटर्न में बदलाव के मुख्य कारण हैं।


1. सुस्ती

यह गर्भावस्था का सबसे जल्दी दिखाई देने वाला लक्षण है। गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में प्रोजेस्टेरोन का उच्च स्तर आपको पूरे दिन नींद का एहसास करा सकता है। हो सकता है कि आप पहले से ज्यादा देर तक सोने लगी हों, लेकिन नींद पूरी नही होती है, क्योंकि अब आपकी नींद ज्यादा टूटती है ।


2. शारीरिक पीड़ा

यदि आपके स्तन संवेदनशील और पीड़ादायक हैं या आपे पेट में दर्द हो रहा है तो ठीक से सोना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, अगर आपको पेट के बल सोने की आदत रही है, तो गर्भवती होने के बाद ऐसा करना मुश्किल और नामुमकिन है।


3. टॉयलेट जाने की आवश्यकता

प्रोजेस्टेरोन के स्तर में परिवर्तन और आपका फैलता हुआ गर्भाशय आपके मूत्राशय पर दबाव डाल सकता है, जिससे पेशाब करने की इच्छा बढ़ जाती है और बार बार वॉशरूम जाना पड़ता है, ये आपके रात में अक्सर जागने का कारण बन सकता है, इस प्रकार आपकी नींद बाधित होती है।


4. मॉर्निंग सिकनेस

हालांकि इसके नाम से यह सुबह-सुबह होने वाली समस्या लगती है, लेकिन मॉर्निंग सिकनेस का मतलब है मतली और यह दिन में किसी भी समय आ सकती है, यहाँ तक कि आपको रात में भी इसके लिए उठना पड़ सकता है ।


5. सीने में जलन

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन आपके लिए गर्भावस्था के दौरान सीने में जलन का कारण बन सकता है। प्रोजेस्टेरोन चूंकि ग्रासनली की मांसपेशियों को आराम देता है, इसलिए पेट की सामग्री वापस उल्टी दिशा में बह सकती है और अपच का कारण बन सकती है, जो बदले में आपकी नींद को बाधित कर सकती है।


6. बेचैनी

गर्भावस्था के दौरान आप जितने भी बदलाव से गुजर रही होती हैं, तो इसे देखते हुए आपकी बेचैनी को समझा जा सकता है और ये बैचेनी बढ़ना आम बात है। शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों में समायोजन बहुत अधिक हो सकता है और आपकी नींद की आदतों को प्रभावित कर सकता है।


ऐसे में सोने की बेहतरीन स्थितियां

पहली बार में आपको ऐसा लग सकता है कि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों के दौरान आरामदायक नींद की कोई मुद्रा संभव नहीं है, क्योंकि गर्भावस्था में प्रगति के साथ पीठ और पेट दोनों ही तरफ सोना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, अगर आपको केवल यही दो मुद्राएं पसंद हैं, तो यह आपकी प्राथमिकताओं को बदलने का समय है। आप पूरी रात आराम की नींद सोने के लिए गर्भावस्था के दौरान सोने की निम्नलिखित स्थितियो में सोने की कोशिश कर सकते हैं।


1. करवट लेकर सोना

दाएं या बाएं करवट पर सोना आपकी गर्भावस्था के सभी चरणों में सुरक्षित और आरामदायक माना जाता है। करवट को बदल-बदल कर सोना सबसे उत्तम है और एक करवट पर लंबे समय तक नहीं सोना चाहिए, विशेष रूप से दाईं ओर क्योंकि दाईं करवट पर सोने से सीने की जलन और बढ़ सकती है।


2. पीठ के बल सोना

हालांकि यह गर्भावस्था के समय सोने की सबसे अच्छी मुद्राओं में से एक नहीं हो सकती है, लेकिन शुरू में पीठ के बल सोना आपके लिए अच्छा काम करता है। पहले 3 महीनों में यह आरामदायक लगता है। जैसे-जैसे आपके पेट का उभार बढ़ता है, यह आपकी पीठ, आंतों और वीना कावा पर दबाव डाल सकता है, और निचले शरीर से हृदय तक रक्त के प्रवाह को रोक सकता है। गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल लंबे समय तक सोने से आपको पीठ दर्द, बवासीर और निम्न रक्तचाप हो सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के शुरूआती दौर में भले इससे आराम मिलता हो लेकिन बाद में इस मुद्रा से बचना ही बेहतर होगा ।


3. बाईं करवट पर सोना

सबसे अच्छा विकल्प है बाईं ओर करवट लेकर सोना, भले ही आप गर्भावस्था के किसी भी चरण में हों। यह स्थिति नाल तक रक्त और पोषक तत्वों के अधिकतम प्रवाह में मदद करती है और गुर्दे के कार्य में सुधार लाती है । इसके साथ ही, आप इससे शरीर की सूजन को भी दूर रख सकती है। गर्भावस्था के दौरान अक्सर हाथ, पैर या टखनों में सूजन आ जाती है।इस मुद्रा से उस से कुछ हद तक बचा जा सकता है।


4. तकिया रखकर सोना

अगर आपने सोने की इन सभी अलग-अलग मुद्राओं को आजमा लिया है फिर भी आपको अभी तक आराम नहीं मिला है, तो अब तकिया लेकर सोने का समय हो सकता है। अपने पैरों को मोड़कर करवट की मुद्रा में लेट जाएं और अपने घुटनों के बीच में एक तकिया रख लें। आप इसके साथ ही अपने पेट को भी एक तकिये लगाकर सहारा दे सकती हैं और देख सकती हैं कि क्या यह आपके लिए काम करता है। करवट के बल सोते समय अपनी पीठ के पीछे एक तकिया या गद्दी रख लें। ये आपको किसी भी समय पीठ की ओर लुढ़कने से रोकेगा।

 

यदि आप सोने की कोशिश करती हैं और उस समय सांस लेने में कठिनाई का अनुभव करती हैं, तो अपनी छाती को ऊपर उठाने और सांस लेने में आसानी पैदा करने के लिए तकिये का उपयोग करते हुए उसे अपने बगल के नीचे रख लें। अलग अलग जगहों पर कुछ तकियों का उपयोग करें जब तक कि आपको सबसे आरामदायक मुद्रा का पता ना लग जाए। एक विशेष वेज पिलो या बॉडी पिलो की मदद से आधे लेटने की मुद्रा में सोना भी कुछ महिलाओं के लिए काम करता है।


क्या नींद की कमी से बच्चे को नुकसान पहुंचेगा?

गर्भावस्था के दौरान नींद की समस्या बहुत आम है, और इससे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन अनिद्रा से थकान हो सकती है और आपको हर समय सुस्ती का अहसास होता है। नींद की कमी से आपको प्री-एक्लेमप्सिया या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं आ सकती हैं। यह गर्भावधि मधुमेह और फेफड़े में उच्चरक्तचाप जैसी समस्याओं का एक सूचक भी हो सकता है। नींद की कमी से प्रसव की अवधि और अंततः डिलीवरी के प्रकार पर भी असर पड़ सकता है। 


गर्भावस्था के दौरान नींद के सहायक

नींद के कुछ सरल और सुरक्षित सहायक हैं, जिनका उपयोग आप यह सुनिश्चित करने के लिए कर सकती हैं कि आपको अपनी गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान आवश्यक नींद मिल पा रही है। पर्याप्त नींद लेना आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है ताकि आप एक आसान और सहज प्रसव कर सकें।


1. एक रुटीन बनाएं

सोने का टाइम टेबल बनाएं। दोपहर में 2 से 4 बजे के बीच कुछ समय के लिए झपकी ले, उसके बाद नहीं, ताकि यह निश्चित हो सके कि आप रात में अच्छी नींद ले पा रही हैं।एक लंबी झपकी के बजाय दो बार की छोटी झपकी भी ले सकती है।


2. बिस्तर को भूल जाएं

ऐसा कोई नियम नहीं हैं कि सोने के लिए आप केवल अपने बिस्तर पर ही जाएं। कोई आरामदायक हत्थेदार कुर्सी ले लें या किसी सोफे पर बैठ जाएं जैसा आपको आरामदायक लगता हो वैसे ही सो जाएं। यहाँ तक कि पोर्च पर कोई आरामदायक रॉकिंग चेयर भी छोटी झपकी के लिए एक अच्छा साबित हो सकता है।


3. सीने में जलन से छुटकारा

सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खाएं ताकि भोजन की पाचन व्यवस्थित हो सके। सोते समय, एक अतिरिक्त तकिये के साथ अपने सिर को थोड़ा ऊंचा रखें। यदि आपको बीच रात में भूख महसूस लगती है तो एक गिलास गर्म दूध पीएं और सोने की तैयारी शुरू करने से थोड़ी देर पहले कुछ हल्का खा लें।


4. सोने से पहले तरल पदार्थ कम लें

गर्भावस्था में आपको बार बार पेशाब करने की इच्छा हो सकती है, खासकर रात के समय में। इसलिए सोने से कुछ घंटे पहले आप उन तरल पदार्थों की मात्रा को सीमित करने का प्रयास करें। लेकिन समय समय पर पानी, जूस और दूध पियें पूरे दिन हाइड्रेटेड रहना जरूरी है।


डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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