गर्भावस्था में अगर आपकी नींद पूरी न हो पाए तो जरूर बरतें ये सावधानियां


गर्भावस्था में अगर आपकी नींद पूरी न हो पाए तो जरूर बरतें ये सावधानियां

गर्भावस्था के समय हमें खाने पीने और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना होता है इसी विषय में एक सबसे जरूरी चीज है वह है पर्याप्त नींद क्योंकि गर्भावस्था के समय तरह तरह की परेशानियों के कारण महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती है इसलिए जरूरी है कि आप बताई गई सावधानियां बरतें और गर्भावस्था के समय पूरी नींद लें ताकि शिशु का विकास भी पूरी तरह से हो पाए।


गर्भावस्था के समय नींद न आने की समस्या

गर्भावस्था के दौरान रात को अच्छी तरह न सोने से नींद पूरी नही हो पाती जिस कारण से गर्भवती को उच्च रक्तचाप व गर्भावधि मधुमेह जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं स्लिप एप्निया, अधिक वजन, अनियंत्रित ग्लूकोज का स्तर व भूख बढ़ने जैसी समस्या भी हो सकती है। 


साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन व रक्त की सप्लाई नहीं हो पाती है, जिस कारण उसका विकास रुक जाता है। इसके अलावा, समय से पूर्व डिलीवरी का अंदेशा बढ़ जाता है। आंकड़ों के अनुसार 14.6 प्रतिशत महिलाओं में ऐसी समस्या पाई गई है।


इसके अलावा कम नींद के कारण निम्न प्रकार की समस्याएं भी हो सकती हैं

जन्म के दौरान शिशु का वजन कम हो सकता है।

सिजेरियन डिलीवरी की आशंका बढ़ सकती है।

गर्भवती महिला को दिनभर ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है।

किसी भी काम को करने में एकाग्रता कम हो सकती है।

इम्यून सिस्टम प्रभावित हो सकता है।

त्वचा पर झाइयां नजर आ सकती हैं।

गर्भवती महिला को तनाव तक का सामना करना पड़ सकता है।


प्रेग्नेंसी में किस प्रकार सोना चाहिए 

गर्भावस्था के समय पीठ या पेट के बल लेटना मां व शिशु दोनों के लिए सुरक्षित नहीं होता। यहां हम लेटने की कुछ अवस्थाएं बता रहे हैं, जो पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए सबसे उपयुक्त हैं।


इस तरह सोना है सही

पेट या कमर के बल लेटने से बेहतर है कि करवट की तरफ सोएं। डॉक्टरों के अनुसार सबसे बेहतर मुद्रा बाईं ओर करवट लेकर सोने की है। दाईं तरफ सोने से गर्भाशय का वजन लिवर पर पड़ता है। बाईं ओर लेटने से शिशु को प्लेसेंटा के जरिए पर्याप्त ऑक्सीजन व पोषक तत्व मिल पाते हैं।

 

रक्त का प्रवाह भी सामान्य रहता है, जो मां व शिशु दोनों के लिए अच्छा है। हाँ, एक तरफ लंबे समय तक सोना मुश्किल है, इसलिए बीच-बीच में दाईं ओर करवट लेकर लेट सकते हैं, लेकिन सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही। 


इस समय कोशिश करें कि ज्यादातर बाईं ओर करवट लेकर ही सोएं। साथ ही घुटनों को मोड़कर सोएं और दोनों घुटनों के नीचे तकिया रख सकते हैं। अगर आप पीठ के बल लेटना चाहते हैं, तो आधे-बैठने की मुद्रा में लेटें यानी कमर से ऊपरी हिस्से के पीछे तकियों को रखें।

 

इससे सीने में जलन से बचा जा सकता है। ध्यान रहे कि गर्भावस्था की पहली तिमाही ऐसी होती है, जिसमें बाईं ओर करवट लेकर लेटने की आदत डाल ली जाए, तो आगे चलकर समस्या नहीं होती।


इस तरह सोने से करें परहेज

प्रेग्नेंसी के शुरुआत में आप पीठ के बल लेट सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना सही नहीं है। पीठ के बल ज्यादा देर तक लेटने से गर्भाशय का दबाव पीठ की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डियों व रक्त नलियों पर पड़ सकता है। इससे शिशु तक रक्त का संचार ठीक तरह से नहीं हो पाता। इससे मांसपेशियों में दर्द व सूजन आ सकती है और रक्तचाप कम हो सकता है। स्लिप एप्निया जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।


गर्भावस्था के दौरान अच्छी और गहरी नींद के लिए सही टिप्स?

सोते समय एक से अधिक तकियों का इस्तेमाल करें। एक तकिया अपने घुटनों के बीच, तो एक अपने पेट के नीचे रखें। इससे आपको आराम मिलेगा और अच्छी नींद आएगी।

 

रात को सोने से पहले भारी या मिर्च-मसाले और तले हुए खाने को न खाएं। इसकी जगह सोने से करीब दो घंटे पहले हल्का भोजन करें और कुछ देर टहलें। अगर आपका मन करे या डॉक्टर कहे, तो सोने से पहले एक गिलास दूध या फिर हर्बल चाय पी सकते हैं।


सुबह के समय योग व हल्के-फुल्के व्यायाम करने से भी रात को अच्छी नींद आ सकती है। सोने से पहले आप अपने हाथों, पैरों, गर्दन व सिर की मालिश करवा सकते हैं। इससे मांसपेशियों में आया तनाव कम होता है और आराम मिलता है।

 

गहरी और लंबी सांसें लेने से भी मांसपेशियों में आए तनाव से राहत मिलती है और ह्रदय की गति सामान्य होती है, जिस कारण नींद आने में समस्या नहीं होती। जिस कमरे और बेड पर आप सोएं वह साफ-सुथरा और माहौल शांत होना चाहिए।


ये बात सही है कि सोना हर किसी के लिए जरूरी है। इससे हम अगले दिन पूरी ऊर्जा के साथ फिर से काम करने के लिए खुद को तैयार कर पाते हैं। वहीं, एक गर्भवती महिला के लिए सोना और भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि उसके पर्याप्त नींद लेने से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे तरीके से होता है।

 

आज इस आर्टिकल से आपको नींद का महत्व समझ आ गया होगा और जो महिलाएं गर्भवती हैं, उन्हें इसके जरिए अपनी नींद से जुड़ी समस्याओं का हल मिल गया होगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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