बिना दवाओं के भी कर सकते हैं PCOS को कंट्रोल, बस रोजाना करें ये 3 योगासन


बिना दवाओं के भी कर सकते हैं PCOS को कंट्रोल, बस रोजाना करें ये 3 योगासन

आजकल कई महिलाऐं पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) की समस्या से जूझ रही हैं। पीसीओएस महिलाओं में होने वाला एक सामान्य हार्मोनल डिसॉर्डर है। यह समस्या युवा से लेकर बुजुर्ग महिलाओं में भी देखी जाती है। इस स्थिति में एक महिला का शरीर एंड्रोजेंस नामक पुरुष हार्मोन को ज्यादा मात्रा में पैदा करने लगता है, जिसकी वजह से शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन की समस्या सामने आती है। यह स्थिति सामन्य मासिक चक्र को बाधित करती है और साथ ही ओवेरियन सिस्ट का कारण भी बन सकती है। पीसीओएस में वजन बढ़ना, पिंपल्स, चेहरे पर बाल, आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। पीसीओएस में इंसुलिन रसिस्टेंस की समस्या भी सामान्य है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक पीसीओएस एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है। खानपान और जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है कई महिलाऐं पीसीओएस की समस्या से निजात पाने के लिए दवाइयों का सेवन करती हैं। हालाँकि, योग से भी इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। आज के इस लेख में हम आपको पीसीओएस में कारगर कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं - 


भुजंगासन 

इस आसान को करने के लिए ज़मीन पर पेट के बल लेट जाएँ। अब अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं। उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहे। अब बाद सांस  छोड़ते हुए, अपने पेट, छाती और फिर सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं।


मर्जरासन

इस आसन को करने के लिए जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। अपने हाथों को जमीन पर रखकर घोड़े की पोजिशन में आ जाएं। अपनी रीढ़ को ऊपर की तरफ उठाते हुए सांस अंदर की ओर खींचे। इस दौरान अपने सिर को ऊपर उठाए रखें। इसके बाद पेट को बीच से ऊपर उठाकर शरीर की नाभि वाले हिस्से को नीचे की ओर झुकाएं। अब सांस छोड़ते हुए ठोड़ी को छाती से लगाएं और रीढ़ को ऊपर की ओर उठाएं।  


उष्ट्रासन

इस आसन में ऊंट की मुद्रा बनाई जाती है और शरीर को पीछे की तरफ झुकाया जाता है। इस आसान को करने के लिए जमीन पर घुटने के बल बैठ जाएं और दोनों हाथों को कूल्हों पर रखें। ध्यान रखें कि आपके घुटने कंधों के समानांतर हों और पैरों के तलवे छत की तरफ हों। अब सांस को अंदर लें और रीढ़ की निचली हड्डी को आगे की तरफ जाने का दबाव डालें। इस दौरान पूरा दबाव नाभि पर महसूस होना चाहिए। इसे करने के दौरान अपनी कमर को पीछे की तरफ मोड़ें। अब धीरे-धीरे हथेलियों की पकड़ पैरों पर मजबूत बनाएं और अपनी गर्दन को ढीला छोड़ दें। गर्दन पर बिल्कुल भी तनाव न दें। इस अवस्था में 30 से 60 सेकेंड तक रहें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पुरानी अवस्था में वापस लौट आएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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