स्वस्थ दांतों और मसूड़ों के लिए इस तरह करें अपने टूथब्रश का चुनाव


स्वस्थ दांतों और मसूड़ों के लिए इस तरह करें अपने टूथब्रश का चुनाव
काफी दफा हम बाजार में जानकर बिना कुछ सोचे समझे टूथ ब्रश खरीद लेते हैं। क्या आपको पता है कि टूथ ब्रश खरीदते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। हर रोज सुबह उठने के बाद हम सबसे पहली चीज का इस्तेमाल करते हैं वह है टूथब्रश। टूथब्रश हम रोजाना की दिनचर्या में प्रयोग करते हैं, पर हमारा ध्यान कभी इस बात पर नहीं जाता है कि यह टूथब्रश हमारे सॉफ्ट मसूड़ों के लिए उपयुक्त है या नहीं और इसी बात में हम सबसे ज्यादा लापरवाही बरतते हैं। आपने कभी सोचा है की टूथब्रश सही ना होने के क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं। टूथब्रश सही ना होने से हमारे दांतो व सॉफ्ट मसूड़ों को हानि पहुंच सकती हैं।


अक्सर लोग फेमस विज्ञापनों व टेलीविजन पर फेमस ब्रांडेड ऐड को देखकर बिना उनकी क्वालिटी देखें उन टूथब्रश को खरीद लेते हैं और फिर उन्हें इस बात का नुकसान उठान पड़ता है। टूथब्रश कभी कोई विज्ञापन को देखकर या किसी सस्ते टूथब्रश के चक्कर में पड़कर नहीं खरीदना चाहिए।टूथब्रश को हमेशा अपने हाथों मे रखकर और उसकी क्वालिटी देख कर ही लेना चाहिए क्योंकि टूथब्रश हमारे दांतो व मसूड़ों जैसी सेंसेटिव पार्ट को साफ करने में काम आता है। तो आइए जानते हैं कि टूथब्रश खरीदते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि हम बेस्ट क्वालिटी का टूथब्रश खरीद सकें।


टूथब्रश की अच्छी ग्रिप:


मार्केट में बहुत सी कंपनियों के टूथब्रश उपलब्ध होते हैं। किसी में रबड़ की ग्रिप होती है पर किसी में नहीं।तो टूथब्रश खरीदते समय पहली बात यही है कि हमें रबड़ की ग्रिप वाले टूथब्रश ही खरीदने चाहिए क्योंकि रबड़ की ग्रिप वाले टूथब्रश हाथों में अच्छी पकड़ बनाए रखते हैं, जिससे हम दांतो को अच्छी तरह से साफ कर पाते है। अगर हमारे हाथों में पकड़ नहीं बनी रहेगी तो हम दांतो को साफ कैसे कर पाएंगे। तो टूथब्रश में रबड़ की ग्रिप का ही चयन करें।


सॉफ्ट ब्रुसेल्स:


यह कई यूनिवर्सिटी शोध में भी सिद्ध हो चुका है की जिस टूथब्रश के ब्रिसल्स सॉफ्ट है वही टूथ ब्रश बहुत ही अच्छा माना गया है। सॉफ्ट ब्रिसल्स से दांतो की सफाई करने पर हम दांतो को और अच्छे से साफ कर सकते हैं क्योंकि सॉफ्ट ब्रिसल्स दांतो के कोनों में जाकर दांतो की सफाई करते हैं। सॉफ्ट ब्रिसल्स के कारण मसूड़ों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है।इसके विपरीत यदि ब्रिसल्स हार्ड हो तो मसूड़ों को कई समस्याओं को झेलना पड़ सकता है। जैसे कि मसूड़ों में ब्लीडिंग, मसूड़ों में दर्द इत्यादि। इतना ही नहीं हार्ड ब्रिसल्स दांतों में सेंसिटिविटी ला सकते हैं।हैं।


टूथब्रश हेड का ध्यान रखें:


टूथब्रश खरीदते समय एक अहम बात यह भी है की टूथब्रश का हेड पार्ट कैसा हो। टूथब्रश का हेड पार्ट चौड़ा नहीं होना चाहिए क्योंकि हेड पार्ट चौड़ा होने से टूथ ब्रश पीछे के दांतो तक नहीं पहुंच पाता है, जिससे पीछे के दातों पर प्लाक जमा का जमा ही रह जाता है  जिसके परिणाम स्वरूप मुंह में दुर्गंध आने लगती है और कई समस्याओं का जन्म हो जाता है जैसे कि कीड़े लगना। टूथ ब्रश का हेड पार्ट पतला होना चाहिए क्योंकि नैरो हेड पार्ट मुंह के अंदर जाकर पीछे के दांतो को भी अच्छे से साफ करता है। जिससे अंदर के दांतो में जमा हुआ प्लाक साफ हो जाता है और मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो जाती है।


ब्रांड का रखें ध्यान:


मार्केट में बहुत से लोकल कंपनी यानी बिना ब्रांड वाले टूथब्रश भी उपलब्ध है, जिन्हें खरीदने से आपको बचना चाहिए क्योंकि बिना ब्रांड वाले टूथब्रश की कोई भी तकनीकी जांच या टेस्टिंग नहीं होती है। इन लोकल टूथब्रश का उद्देश्य कस्टमर सेटिस्फेक्शन नहीं होता है बल्कि इनका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना होता है। इसलिए टूथब्रश हमेशा अच्छा ब्रैंड का खरीदें क्योंकि ब्रांडेड कंपनी अपने प्रोडक्ट की टेस्टिंग में तकनीकी जांच करके ही मार्केट में लांच करते हैं।जिससे उपभोक्ता को किसी भी तरह की परेशानी ना आए।


बच्चों के लिए सही साइज का चुनाव:


यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं तो उनका ख्याल उनके खाने तक ही नहीं बल्कि आपको उनके ब्रश का भी ध्यान रखना चाहिए। शुरुआती दौर में बच्चों के दांत बहुत ही नाजुक होते हैं उनके दांतो के लिए आपको सही प्रकार के ब्रश का चुनाव करना चाहिए। आपको ख्याल रखना चाहिए कि आप किस तरह का ब्रश अपने बच्चे को इस्तेमाल करने के लिए दे रहे हैं। हर ब्रश कंपनी बच्चों के लिए एक खास तरह की डिजाइन  का ब्रश बनाती है ताकि उनके दांतों और मसूड़ों को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचे और उनकी सफाई भी अच्छे से हो जाए। इसीलिए आप को बच्चों के लिए सही साइज का चुनाव करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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