क्या महिलाओं के लिए वरदान है शतावरी? जानिए शतावरी के फायदे और नुकसान


क्या महिलाओं के लिए वरदान है शतावरी? जानिए शतावरी के फायदे और नुकसान

भारत में औषधियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं जिनके उपयोग से शरीर की लगभग सभी बीमारियों का रामबाण इलाज किया जा सकता है। भारत का हिमालयीन क्षेत्र भी जड़ी-बूटियों से भरा हुआ है।

 

अंग्रेजी दवाइयों के इतर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का अपना महत्व है, इसी क्रम में आज हम आपसे एक ऐसी जड़ी-बूटी के बारे में बात करने जा रहे हैं जो कहने को तो सेक्स पावर बढ़ाने का काम करती है लेकिन ऐसा इस जड़ी बूटी से चिर-परिचित लोग नहीं कह सकते क्योंकि अनेक फायदों के साथ ही यह कई बीमारियों को दूर करने का माद्दा रखती है। दरअसल आज इस लेख के माध्यम से हम आपसे शतावरी के फायदे उपयोग और इसके महत्व के बारे में बात करने जा रहे हैं। 


शतावरी क्या है?

आम भाषा में शतावर के नाम से विख्यात शतावरी जड़ी-बूटी का वैज्ञानिक नाम एस्पेरेगस रेसिमोसस है। शतावरी को केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाओं से सम्बन्धित रोगों में प्रभावकारी बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित शतावरी के गुणों के मुताबिक लगभग सौ से अधिक रोगों के इलाज के लिए इसे उपयुक्त माना गया है। बताया जाता है कि शतावरी की खोज साल 1799 में की गई, आमतौर पर करीबन 1-2 मीटर लंबी होने वाली शतावरी भारत के कुछ इलाकों में सब्जी के तौर पर भी इस्तेमाल की जाती है।


शतावरी के प्रकार

भारत में मुख्यतः तीन प्रकार की शतावरी पायी जाती है, पहली सफेद शतावरी दूसरी बैंगनी शतावरी और तीसरी हरी शतावरी, जिसमें सफेद शतावरी को सूरज की रोशनी से दूर रखते हुए मिट्टी के भीतर उगाया जाता है। क्योंकि ये मिट्टी के अंदर उगाई जाती है इसीलिए इसका रंग सफेद होता है। दूसरी बैंगनी शतावरी एंटीऑक्सीडेन्टस् से भरपूर होती है जो काफी गुणकारी भी मानी जाती है। वहीं तीसरी शतावरी होती है हरी शतावरी जिसे सुरज की किरणों के सामने ही उगाया जाता है, जिसकी वजह से इसका रंग हरा होता है और ये हरी शतावरी भी बेहद फायदेमंद होती है।


शतावरी के फायदे


सेक्स पावर बढ़ाने में कारगर 

शतावरी को सेक्स क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर माना जाता है, कामेच्छा की उच्च कोटि की भावना जागृत करने में सहायक होती है। माना जाता है कि इसके लगातार सेवन से सेक्स की चाह बढ़ती है वहीं ऐसे स्त्री व पुरूष जो सेक्स के प्रति अपना प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं दिखा पाते उनकी क्षमता को बढ़ाने में शतावरी बेहद सहायक जड़ी-बूटी होती है। इस बिजी लाइफ में ऐसे दम्पत्ति जो अधिकतर काम में व्यस्त रहते हैं वो निजी लाइफ में कुछ निजी क्षणों में बेहतर नहीं महसूस कर पाते उन्हें शतावरी लेने से फायदा मिलता है। 


वजन घटाने में सहायक 

शतावरी में साल्यूबल और इन सॉल्यूबल फाइबर मौजूद होते हैं जो वजन कम कर फैट घटाने का काम भी करते हैं। शतावरी में 90 फीसदी से अधिक पानी की मात्रा होती है जबकि कैलोरीज भी 20 से 30 होती है। 


मधुमेह में शतावरी का उपयोग 

शतावरी का उपयोग मधुमेह जैसी बीमारियों में भी किया जाता है। मधुमेह को अंग्रेजी में डायबिटीज कहा जाता है यानि शतावरी के सेवन से शरीर में एंटीडायबिटीज तत्व तैयार होते हैं जिससे मधुमेह को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। 


माइग्रेन प्रॉब्लम का शतावरी से इलाज 

माना तो ऐसा जाता है कि माइग्रेन प्रॉब्लम का कोई इलाज ही नहीं है लेकिन शतावरी के सेवन को माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए आवश्यक बताया गया है। क्योंकि शतावरी में राइबोफ्लेविन नाम का विटामिन पाया जाता है जो माइग्रेन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है। माइग्रेन प्रॉब्लम से पीड़ित व्यक्ति अपनी इस बीमारी से बेहद परेशान होता है क्योंकि सर का अचानक इतना तेज दर्द होना बर्दाश्त से बाहर हो जाता है वहीं इस तरह का दर्द 24 से 48 घंटे तक सहना माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है। 300 ग्राम शतावरी का सेवन रोजाना करने से माइग्रेन की समस्या दूर होती है।


महिलाओं के लिए गर्भावस्था के समय शतावरी है वरदान 

शतावरी का सेवन किसी भी गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि शतावरी में मौजूद फोलेट गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों के लिए जरूरी होता है। गर्भ धारण करने दौरान महिलाओं को शतावरी का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास में सहायता मिलती है। 


यूरीन प्रॉब्लम और किडनी के रोगों के लिए फायदेमंद

यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन को दूर करने में शतावरी अपना असर दिखा सकती है क्योंकि शतावरी में विटामिन A की मात्रा मौजूद होती है। वैज्ञानिकों के मत के मुताबिक विटामिन ए यूरीनरी इन्फेक्शन को दूर करने में सक्षम होता है। वहीं किडनी से संबंधित रोगों के लिए शतावरी रामबाण इलाज है, क्योंकि शतावरी को लेने से यूरीन में अधिकता आती है जिसकी वजह से इसे लेने वाला व्यक्ति बार-बार पेशाब करने के लिए जाता है, ऐसे में यूरीन के माध्यम से शरीर में मौजूद अनचाहे तरल पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। जिससे किडनी में होने वाली समस्या से निजात मिलती है।


शतावरी से होने वाले नुकसान 

हर दवाई के कुछ साइड-इफेक्ट्स जरूर होते हैं चाहे वो अंग्रेजी दवाईयां हो या आयुर्वेदिक दवाईयां यानि किसी भी दवा का अतिरिक्त डोज या चिकित्सको के बताए प्रिस्क्रिपशन के मुताबिक न लिया गया डोज आपके शरीर को डैमेज कर सकता है वहीं कभी कभार इससे इंसान को मौत तक आ जाती है। इसीलिए शतावरी के कुछ बेहतरीन फायदों के बाद कुछ नुकसान और साइडइफेक्ट्स भी जानना जरूरी है।

 

महिलाओं के लिए शतावरी मानो वरदान है क्योंकि माहवरी के दौरान होने वाली पीड़ा को जिस तरह से महिलाएं बर्दाश्त कर लेती हैं उसका दुख केवल वहीं जान सकती हैं, लेकिन हर समस्या का हल जरूर भगवान ने बनाया है, शायद इसीलिए शतावरी को महिलाओं के माहवरी के दौरान होने वाली समस्याओं को दूर करने योग्य बनाया है। शतावरी के फायदे के बाद उसके नुकसान में क्रमशः कुछ इस तरह की समस्याएं पनपती हैं जैसे गैस होना एलर्जी और किडनी में पथरी बनना आदि।


    



   

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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