क्यों जरूरी है हमारे शरीर के लिए विटामिन डी?


क्यों जरूरी है हमारे शरीर के लिए विटामिन डी?

कविता तिवारी (47 साल) अक्सर शरीर में तेज दर्द की शिकायत करती थीं। उन्हें यूरिक एसिड से लेकर गठिया तक की दवा दी गई लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। तब मैनें उनसे विटामिन डी की जांच कराने को कहा। टेस्ट में विटामिन डी लेवल निकला 3, जोकि नॉर्मल (20 से 50 ng/mL) से बहुत-बहुत कम था। मैनें विटामिन डी की डोज दी। 1 सप्ताह में ही कविता तिवारी की दर्द की शिकायत खत्म हो गई।

 

मनोज गुप्ता की उम्र 35 साल है। हाल के दिनों में वह अक्सर थके रहने और कभी-कभार शरीर में दर्द की शिकायत करते हैं। हालांकि उन्हें कभी कोई चोट आदि नहीं लगी। उन्होंने कई तरह के टेस्ट कराए, पर मर्ज समझ नहीं आया।

 

फिर मैनें विटामिन डी का टेस्ट कराया तो पता लगा कि उनके शरीर में विटामिन डी लेवल काफी कम है। मेरी सलाह से उन्होंने विटामिन डी की डोज ली। 1 सप्ताह में ही मनोज गुप्ता की थके रहने , दर्द की शिकायत खत्म हो गई।


दरअसल, विटामिन डी हॉर्मोन की कमी और उससे होने वाली समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर शहरों में। वजह, अब लोग धूप में ज्यादा नहीं निकलते। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी और उससे जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती। अगर विटामिन डी की डोज नियमित रूप से ली जाए तो आसानी से दर्द से राहत मिल सकती है।

 

विटामिन डी क्यों जरूरी ?

 

- हड्डियों, मसल्स और लिगामेंट्स की मजबूती के लिए

 

- शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए

 

- नर्व्स और मसल्स के कॉर्डिनेशन को कंट्रोल करने के लिए

 

- सूजन और इन्फेक्शन से बचाने के लिए

 

- किडनी, लंग्स, लिवर और हार्ट की बीमारियों की आशंका कम करने के लिए

 

- कैंसर की रोकने में मदद के लिए

 

कमी से होने वालीं दिक्कतें

 

- हड्डियों का कमजोर और खोखला होना

 

- जोड़ों और मसल्स का कमजोर होना

 

- कमर और शरीर के निचले हिस्सों में दर्द होना खासकर पिंडलियों में

 

- हड्डियों से कट की आवाज आना

 

- इम्युनिटी कम होना

 

- बाल झड़ना

 

- बहुत थकान और सुस्ती रहना

 

- बेचैन और तुनकमिजाज रहना

 

- इनफर्टिलिटी का बढ़ना

 

- पीरियड्स का अनियमित होना

 

- ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखला होना) और ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का कमजोर होना) जैसी बीमारियां

 

- बार-बार फ्रेक्चर होना


कितना विटामिन डी चाहिए ?

किसी भी सेहतमंद शख्स में विटामिन डी का लेवल 50 ng/mL या इससे ज्यादा होना चाहिए। हालांकि 20 से 50 ng/mL के बीच नॉर्मल रेंज है लेकिन डॉक्टर 50 को ही बेहतर मानते हैं। अगर लेवल 25 से कम है तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी सप्लिमेंट जरूर लेना चाहिए।

 

टेस्ट और इलाज:

अगर हड्डियों या मसल्स में दर्द रहता है तो ' 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी ' ब्लड टेस्ट कराएं। इसे ' विटामिन डी डिफिसिएंशी टेस्ट ' भी कहते हैं। अगर शरीर में दर्द नहीं है तो भी यह टेस्ट करा सकते हैं। अगर लेवल काफी कम निकलता है तो छह महीने या साल भर बाद दोबारा करा सकते हैं।

 

कीमत: करीब 1200-1300 रुपये

 

इलाज:

विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए बच्चों को एक बार में 6 लाख IU (इंटरनैशनल यूनिट) दी जाती हैं। यह कई बार इंजेक्शन के जरिए भी दिया जाता है। फिर नॉर्मल रेंज आने तक एक महीने हर हफ्ते 60,000 यूनिट और फिर हर महीने 60,000 यूनिट दी जाती है, जोकि ओरली दी जाती है।

 

बड़ों में एक बार में 12 लाख IU (इंटरनैशनल यूनिट) दी जाती हैं। फिर पहले तीन महीने हर हफ्ते 60,000 यूनिट और फिर हर महीने एक बार 60,000 यूनिट का सैशे दिया जाता है।


अगर धूप में नहीं निकलते हैं तो 25-30 साल की उम्र के बाद हर महीने एक सैशे लेना चाहिए।

 

नोट:

वैसे, ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि यह टेस्ट कराए बिना और डॉक्टर की सलाह के बिना भी हर किसी को विटामिन डी की डोज लेनी चाहिए क्योंकि इसकी पूर्ति खाने से नहीं हो पाती और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है।

 

महीने में एक बार सैशे लेने का नुकसान नहीं है। एक सैशे से महीने भर के विटामिन डी का कोटा पूरा हो जाता है। इसकी कीमत भी 25-30 रुपये तक ही होती है यानी महंगा भी नहीं है।

 

जहां तक बच्चों की बात है तो 50 किलो से ज्यादा वजन के बच्चे को अडल्ट के मुताबिक ही डोज दी जा सकती है लेकिन छोटे बच्चों को डॉक्टर की सलाह से डोज दें। इंटरनैशनल गाइडलाइंस के मुताबिक बच्चे को जन्म से लेकर 12 महीने का होने तक रोजाना 4000 यूनिट दी जानी चाहिए। इसके लिए मां को विटामिन डी लेने की सलाह दी जाती है ताकि दूध के जरिए यह बच्चे तक में पहुंच सके। अगर मां बच्चे को दूध नहीं पिलाती है तो डॉक्टर बच्चे के लिए सिरप लिखते हैं। उम्र बढ़ने पर बच्चे में विटामिन डी की जरूरत बढ़ जाती है। वैसे एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को रोजाना एक घंटे धूप में खेलने के प्रेरित करना चाहिए। इस दौरान बच्चे का शरीर कुछ खुला हो ताकि उसे पर्याप्त विटामिन डी मिल सके। अगर फिर भी बच्चा धूप में ज्यादा नहीं खेलता तो उसे विटामिन डी दे सकते हैं लेकिन पहले डॉक्टर से पूछ लें या फिर टेस्ट करा कर लेवल चेक कर लें।

 

कब लें खुराक ?

विटामिन डी की खुराक यूं तो खाली या भरे पेट कभी भी ले सकते हैं लेकिन फिर भी इसे खाने के बाद लेना बेहतर है।

 

ज्यादा हो तो खतरनाक

वैसे, विटामिन डी अगर बहुत ज्यादा हो तो बहुत खतरनाक हो सकता है। ज्यादा तब माना जाता है, जब शरीर में लेवल 800-900 नैनोग्राम/मिली तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर किडनी फंक्शन से लेकर मेटाबॉलिजम तक पर असर पड़ता है। हालांकि विटामिन डी बहुत ही कम मामलों में इस लेवल तक जा पाता है।

 

कई बार लोगों को लगता है कि विटामिन डी ज्यादा लेने से नुकसान हो सकता है। मुंह से लिए जानेवाले विटामिन डी का कोई नुकसान नहीं है। यह एक्स्ट्रा विटामिन डी शरीर से पॉटी या यूरीन के रास्ते निकल जाता है। लेकिन इंजेक्शन से लिया जानेवाला सारा विटामिन डी शरीर में ही रह जाता है इसीलिए विटामिन डी के सैशे, टैब्लेट या कैप्लूस ही लेने की सलाह दी जाती है।

 

...ताकि न हो कमी

 

1. कैसे मिलेगा कुदरती तरीके से विटामिन डी

 

विटामिन डी का सबसे बढ़िया सोर्स सूरज की रोशनी है। विटामिन डी पाने के लिए आप धूप में बैठें। खासियत यह है कि एक बार शरीर में जाने के बाद विटामिन डी लिवर में स्टोर हो जाता है और फिर धीरे-धीरे लिवर जरूरत के मुताबिक इसे ब्लड में रिलीज करता रहता है। ऐसे में रोजाना धूप में बैठना या निकलना भी जरूरी नहीं है।

 

अगर आप हफ्ते में 1-2 दिन या महीने में कुल 4-5 दिन और साल भर में औसतन 45-50 दिन आप 45 मिनट के लिए धूप में निकलते हैं या बैठते हैं तो काफी हद तक विटामिन डी की खुराक पूरी हो जाती है। लेकिन ध्यान रखें कि इस दौरान शरीर का कम-से-कम 80-85 फीसदी हिस्सा खुला हो। वैसे, जब सूरज की किरणें बहुत तेज हों, तब विटामिन डी भी ज्यादा मिलता है लेकिन उस वक्त अल्ट्रा-वॉयलेट किरणों से शरीर को होनेवाले संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए सुबह या शाम की धूप में बैठना ही बेहतर है। यूं भी दिन की धूप में बैठना प्रैक्टिकली मुमकिन नहीं है। ऐसे में गर्मियों में सुबह 8-10 बजे और शाम को 4-6 बजे और सर्दियों में सुबह 9-12 बजे और शाम को 3-5 बजे के बीच का समय चुनें। अगर शरीर को खुला वैसे बेहतर यह है कि आप खुद को किसी नियम में बांधने की बजाय सोच लें कि जब भी मुमकिन होगा, धूप में निकलेंगे या बैठेंगे तो शरीर को विटामिन डी मिलता रहेगा।

 

नोट : कई बार जन्म से ही विटामिन डी की कमी होती है। इस बीमारी को ' रिकेट्स ' कहते हैं और इन बच्चों के पैर टेढ़े हो जाते हैं। हालांकि यह बीमारी अब काफी कम होती है। इसके अलावा अगर किडनी विटामिन डी को ऐक्टिव फॉर्म में नहीं बदलती तो भी विटामिन डी की कमी हो सकती है। लेकिन ऐसे मामले भी चुनींदा ही होते हैं।

 

2. डाइट

 

- विटामिन डी फैट में घुलनेवाला विटामिन है। यह शरीर में अच्छी तरह जज्ब हो, इसके लिए हमें हेल्दी फैट जैसे कि ड्राई-फ्रूट्स, कम फैट वाले डेयरी प्रॉडक्ट्स, चीज़ आदि जरूर लेने चाहिए।

 

- मछली, मशरूम, अंडे और मीट में विटामिन डी पाया जाता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि आपके शरीर की जरूरत पूरी कर सके।

 

- दूध और दूध से बनी चीजें जैसे कि पनीर, दही, योगर्ट आदि में कैल्शियम काफी होता है। रोजाना कम-से-कम एक गिलास दूध (लगभग 230 ml कैल्शियम), एक कटोरी दही (करीब 250 mg) और हफ्ते में 250 ग्राम पनीर (करीब 200 mg कैल्शियम) जरूर खाना चाहिए।

 

- हरी सब्जियों जैसे कि मशरूम, पालक, बीन्स, ब्रोकली, चुकंदर, कमल ककड़ी आदि और केला, संतरा, शहतूत, सिंघाड़ा आदि फलों में भी कैल्शियम पाया जाता है।

 

- ड्राई-फ्रूट्स (बादाम, किशमिश, खजूर, अंजीर, अखरोट आदि), तिल और अंडे भी खाना चाहिए क्योंकि इनमें काफी कैल्शियम होता है। राजमा, मूंगफली, तिल, टूना मछली खाना भी फायदेमंद हैं।

 

3. एक्सरसाइज है जरूरी

 

रोजाना कम-से-कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। एक्सरसाइज शरीर को फिट रखने और उसके सही तरीके से काम करने के लिए बेहद जरूरी है। यहां तक एक्सरसाइज ब्लड में मौजूद विटामिन डी और कैल्शियम को जज्ब करने में भी मदद करती है।

 

अगर आप रोजाना 1 घंटा एक्सरसाइज करते हैं तो बाकी 23 घंटे फिट और खुशहाल रह सकते हैं। अगर यह एक घंटा अपने लिए नहीं निकाल सकते तो फिर 24 घंटे हेल्थ को लेकर परेशान रहेंगे। एक्सरसाइज में कार्डियोवसकुलर, स्ट्रेंथनिंग और स्ट्रेचिंग को मिलाकर करें। कार्ड्रियो के लिए साइकलिंग, अरोबिक्स, स्वीमिंग या डांस, स्ट्रेंथनिंग के लिए वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेचिंग के लिए योग करें। अगर वॉक करना चाहते हैं तो कम-से-कम 45 मिनट ब्रिस्क वॉक यानी तेज-तेज चलें।


सनस्क्रीन को लेकर कन्फ्यूजन

 

आजकल लोग घर से बाहर निकलते हुए सनस्क्रीन लगाते हैं। सनस्क्रीन सूरज की किरणों को ब्लॉक करता है। इससे शरीर को धूप नहीं मिल पाती। कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि सनस्क्रीन न लगाएं जबकि कुछ कहते हैं कि सनस्क्रीन न लगाने से स्किन को नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में बेहतर है कि सनस्क्रीन लगाना जारी रखें लेकिन विटामिन डी पाने के लिए अलग से धूप में बैठने का समय तय कर लें।

 

आयर्वेद में इलाज

 

- रोजाना एक चम्मच मेथी दाना भिगोकर खाएं। मेथी दर्दनिवारक है और हड्डियों के लिए अच्छी है।

 

- गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर पिएं।

 

- रोजाना एक चम्मच बादाम का तेल (बादाम रोगन) दूध में डालकर पिएं।

 

- विटामिन डी के सप्लिमेंट ले सकते हैं।

 

- डॉ. सुभाष शल्य

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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