स्पर्म फ्रीजिंग है संतान सुख पाने का अनोखा तरीका, पढ़ें क्या है इसका पूरा प्रोसेस


स्पर्म फ्रीजिंग है संतान सुख पाने का अनोखा तरीका, पढ़ें क्या है इसका पूरा प्रोसेस

आजकल इंफर्टिलिटी या बांझपन की समस्या से निपटने के लिए कई मेडिकल विकल्प मौजूद हैं। कई निःसंतान कपल्स संतान सुख पाने के लिए आईवीएफ, आईयूआई और स्पर्म डोनेशन जैसे कई तरीके अपनाते है। स्पर्म फ्रीजिंग भी संतान सुख पाने का ऐसा ही एक तरीका है। हालाँकि, बहुत कम लोगों को इस बारे में पूरी जानकारी होती है जिसकी वजह से वे इसका लाभ नहीं उठा पाते। आइए जानते हैं स्पर्म फ्रीजिंग क्या होता है -   


स्पर्म फ्रीजिंग क्या है?

स्पर्म फ्रीजिंग एक ऐसी प्रक्रिया से है जिसमें पुरुष के स्पर्म को फ्रीज करके स्टोर किया जाता है। इसे सीमेन क्रायोप्रिजर्वेशन या स्पर्म बैंकिंग भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया से पुरुष के स्पर्म को जमा करके रखा जाता है ताकि बाद में जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।  


क्यों किया जाता है स्पर्म फ्रीज़? 

ऐसे कपल्स जो फिलहाल फैमिली प्लानिंग के बारे में नहीं सोच रहे हैं, वे भविष्य में स्पर्म फ्रीजिंग की सहायता से बेबी प्लान कर सकते हैं।   


जो कपल्स अधिक उम्र में माँ-बाप बनना चाहते हैं, वे भी स्पर्म फ्रीजिंग की सहायता ले सकते हैं।


यदि कोई पुरुष नसबंदी करवा ले तो भविष्य में स्पर्म फ्रीजिंग में स्टोर किए गए स्पर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है।


नि:संतान दंपत्तियों के लिए स्पर्म फ्रीजिंग संतान सुख प्राप्ति का अनोखा तरीका है।


कई बार किसी बीमारी या किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण डॉक्टर भी स्पर्म फ्रीजिंग की सलाह दे सकते हैं। जिन पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने से इंफर्टिलिटी का खतरा होता है उनके लिए स्पर्म फ्रीजिंग काफी सफल साबित हो सकता है। 


कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पुरुष के स्पर्म काउंट और स्पर्म की गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन के कारण स्पर्म काउंट काफी कम हो जाता है, ऐसे में स्पर्म फ्रीज़ करवाना लाभकारी साबित हो सकता है।


समलैंगिक जोड़े भी संतान सुख की प्राप्ति के लिए स्पर्म फ्रीजिंग का विकल्प चुन सकते हैं।


स्पर्म फ्रीजिंग की प्रक्रिया क्या है? 

स्पर्म फ्रीजिंग एक मल्टी-स्टेप प्रक्रिया है यानि इसमें कई सारे स्टेप शामिल होेते हैं। 


सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेने के बाद को ब्लड टेस्ट कराना होगा। ब्लड टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि उस व्यक्ति का स्पर्म फ्रीज किया जा सकता है या नहीं। ब्लड टेस्ट से पुरुष के स्पर्म काउंट, स्पर्म की गुणवत्ता या किसी बीमारी का पता लगाया जाता है। 


अगर ब्लड टेस्ट के बाद इस बात की पुष्टि हो जाती है कि व्यक्ति का स्पर्म फ्रीज किया जा सकता है तो उसका स्पर्म सैंपल क्लेक्ट किया जाता है। स्पर्म कलेक्ट करने की प्रक्रिया किसी अस्पताल या मेडिकल सेंटर में पूरी की जाती है। आजकल होम स्पर्म बैंकिंग किट्स भी मौजूद हैं जिससे आप घर पर भी अपना स्पर्म सैंपल कलेक्ट कर सकते हैं।  


स्पर्म को क्लेक्ट करने के बाद उसे एक विशेष मेडिकेटेड सॉल्यूशन के साथ मिलाया जाता है और उसे 3-4 जार में स्टोर करके रखा जाता है।


स्पर्म सैंपल को फ्रीज करने के लिए उसे ठंडा किया जाता है और धीरे-धीरे उसके तापमान को -198 तक लाया जाता है।


स्पर्म फ्रीजिंग से स्पर्म को कितने समय के लिए स्टोर किया जा सकता है? 

स्पर्म फ्रीजिंग की प्रक्रिया से स्पर्म को करीब 10 साल तक स्टोर किया जा सकता है। हालाँकि, यह हर व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है कि वह अपने स्पर्म को कितने समय बाद इस्तेमाल करना चाहता है। 

स्पर्म फ्रीजिंग में कितने पैसे लगते हैं? 

स्पर्म फ्रीजिंग में कितना कितना खर्चा आएगा यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे आप किस अस्पताल या क्लीनिक में स्पर्म फ्रीजिंग करवा रहे हैं। शहर या जगह के हिसाब से भी स्पर्म फ्रीजिंग की लागत अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा स्पर्म फ्रीजिंग में कितना खर्चा आएगा वह इसके तरीके पर भी काफी निर्भर करती है। औसतन रूप से स्पर्म फ्रीजिंग की प्रक्रिया में 15 हजार से 1 लाख तक का खर्चा आता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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