बचपन में बच्चे को जीना पड़ता है वृद्ध की तरह जानें खतरनाक बीमारी का नाम


बचपन में बच्चे को जीना पड़ता है वृद्ध की तरह जानें खतरनाक बीमारी का नाम

फिल्म पा में ऑरो नाम का बच्चा जिसका अभिनय अमिताभ बच्चन ने करते हुए इस बीमारी के बारे में सबको उजागर किया था, तब से लोगों ने इस बीमारी को जानने में अपनी दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया था। इस बीमारी का नाम एजिंग या हचिनसन गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम और हचिंगसन-गिल्फोर्ड सिंड्रोम हैं जिसे आम भाषा में प्रोजेरिया भी कहते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चा अपनी खेल कूद की उम्र में वृद्धावस्था का जीवन व्यतीत करने लगता है। प्रोजेरिया बच्चे के जन्म के 2 या 3 साल बाद से उन्हें लग जाती है। प्रोजेरिया के लक्षण बच्चे में पैदा होने के बाद से ही आने लग जाते है।

प्रोजेरिया बीमारी कब आई- प्रोजेरिया एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो बच्चों को उम्र से पहले बूढ़ा बना देती है। प्रोजेरिन नाम के एक प्रोटीन से प्रोजेरिया की बीमारी का जन्म हुआ था। डॉ. जॉनथन हचिंसन ने प्रोजेरिया का पहला केस 1886 में देखा था और प्रोजेरिया का दूसरा केस 1904 में डॉ. हेस्टिंग्स गिल्फोर्ड ने दर्ज किया था। जिसके बाद इस बीमारी का नाम इन डॉक्टर्स पर रखा गया। इस बीमारी से 4-8 मिलियन में से कोई एक बच्चा ग्रस्त होता है, आमतौर पर प्रोजेरिया जींस में बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है।

प्रोजेरिया के शुरूआती लक्षण- इस बीमारी में बच्चों की उम्र सात गुना ज्यादा तेजी बढ़ना शुरू होने लगती है, एक बच्चा सात साल की उम्र में 70 साल का जीवन बिताने लगता है। प्रोजेरिया के मुख्य लक्षणों में बच्चों में गंजापन, शरीर का न बढ़ना, झुर्रियां, बालों का झड़ना, कमजोरी, सर और चहरे का शरीर से बड़ा  होना आम है। प्रोजेरिया बीमारी होने के 18 महीने के बाद बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर की चमड़ी के अंदर त्वचा जगह-जगह से मोटी व खुरदरी होना तथा प्रोजेरिया में मोतियाबिंद, सांस के रोग 13 साल की उम्र में होना लाजमी होता है।

प्रोजेरिया के बाद के लक्षण- प्रोजेरिया होने के बाद पीड़ित बच्चे का दिमागी विकास आम बच्चों की तरह ही काम करता है तथा शरीर 60 या 70 साल का दिखने लगता है। प्रोजेरिया होने के कारण बच्चे में बुढ़ापा आने लगता है जिसके बाद जोड़ों में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और दिल का दौरा जैसी बीमारियां होने लगती हैं।

प्रोजेरिया का इलाज- प्रोजेरिया बीमारी का कोई इलाज आज तक नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों द्वारा कहा गया है कि जल्द इसका इलाज ढूंढा जाएगा। प्रोजेरिया के कारण हो रही दिल की बीमारी और जोड़ों में दर्द जैसी कई बीमारीयों के इलाज हैं लेकिन प्रोजेरिया का कोई इलाज नहीं है। दुनियाभर में प्रोजेरिया के अब तक 250 केस दर्ज हुए हैं जिसमे से 150 केस वैज्ञानिकों के आगे देखें गए है।

प्रोजेरिया एक ग्रीक भाषा से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ प्रो. मतलब पहले और जेरास मतलब बुढ़ापा, यानी वक्त से पहले बुढ़ापा। 1886 में डॉ. जोनाथन हचिनसन और 1897 में डॉ. हटिंग्स गिलफोर्ड ने इस बीमारी की खोज की थी।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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