जानें कब की जाती है पॉलीपेक्टोमी और क्या है प्रक्रिया


जानें कब की जाती है पॉलीपेक्टोमी और क्या है प्रक्रिया

पॉलीपेक्टॉमी क्या है?

पॉलीपेक्टॉमी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल कोलन यानी बड़ी आंत के अंदर से पॉलीप्स को निकालने के लिए किया जाता है। एक पॉलीप टिश्यू (ऊतक) का एक असामान्य संग्रह होता है। इस प्रक्रिया में किसी तरह के मेडिकल उपकरणों को शरीर के भीतर इस्तेमाल नहीं किया जाता है और यह आमतौर पर कोलोनोस्कोपी के रूप में एक ही समय पर की जाती है।


पॉलीपेक्टोमी क्यों की जाती है?

कोलन के कई ट्यूमर घातक कैंसर (मलिग्नैंट) बनने से पहले एक गैर-कैंसर (बेनिग्न) के रूप में विकसित होते हैं। कोलन में किसी भी पॉलीप्स की उपस्थिति का पता लगाने के लिए सबसे पहले कोलोनोस्कोपी की जाती है। यदि किसी पॉलिप का पता चलटा है तो  पॉलीपेक्टॉमी के जरिए टिश्यू को हटा दिया जाता है। इसके बाद टिश्यू की जांच करके यह निर्धारित किया जाता है कि क्या ये टिश्यू कैंसर बनाने वाले हैं या नहीं। इससे कोलन कैंसर को रोका जा सकता है।


पॉलीप्स अक्सर किसी भी लक्षण से जुड़े नहीं होते हैं। हालांकि, बड़े पॉलीप्स के कारण ये लक्षण देखने को मिल सकते हैं:

  • मलाशय से रक्तस्राव
  • पेट में दर्द
  • आंत्र अनियमितता


पॉलीपेक्टॉमी की प्रक्रिया 

पॉलीपेक्टॉमी आमतौर पर कोलोनोस्कोपी के रूप में एक ही समय में किया जाता है। कोलोनोस्कोपी के दौरान, एक कोलोनोस्कोप को मलाशय में डाला जाता है ताकि डॉक्टर आपके कोलन के सभी हिस्सों को देख सके। कोलोनोस्कोप एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है जिसमें कैमरा और उसके अंत में लाइट होती है। यदि डॉक्टर को आपके कोलोनोस्कोपी के दौरान पॉलीप्स का पता लगता है, तो वे आमतौर पर एक ही समय में पॉलीपेक्टॉमी करते हैं।


कई तरीके हैं जिनमें पॉलीपेक्टॉमी किया जा सकती है। आपके डॉक्टर किस तरीके का चयन करते हैं यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कोलन में किस तरह के पॉलीप्स हैं।


कोलोनोस्कोपी के माध्यम से पॉलीप हटाने के दो मुख्य तरीके हैं:


कोल्ड फोरसेप पॉलीपेक्टॉमी: ये आमतौर पर छोटे पॉलीप्स के साथ प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक में पॉलीप को खींचने के लिए  फोरसेप का इस्तेमाल किया जाता है। सर्जन पॉलीप के हिस्से को हटाने के लिए एक तार का भी इस्तेमाल करता है जो टिश्यू तक फैलता है।


हॉट फोरसेप पॉलीपेक्टॉमी: यह तकनीक भी कोल्ड फोरसेप पॉलीपेक्टॉमी के समान है। हालांकि, इसमें पॉलीप की नोक को पकड़ने के अलावा, सर्जन इलेक्ट्रोकेयूट्री नामक एक प्रक्रिया का उपयोग करता है, जिससे किसी भी बचे हुए पॉलीप टिश्यू को जला दिया जा सके और रक्तस्राव को रोका जा सके।


स्नेयर पॉलीपेक्टॉमी : एक स्नेयर एक लूप होती है जो पॉलीप को पकड़ सकती है और निकाल सकती है। अगर पॉलिप 1 सेमी से बड़ा हो तो  स्नेयर पॉलीपेक्टॉमी का इस्तेमाल किया जाता है। स्नेयर गर्म या ठंडा हो सकता है। इसके अलावा सर्जन किसी भी बचे हुए पॉलीप टिश्यू को जलाने के लिए इलेक्ट्रोकेट्री का इस्तेमाल भी कर सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


Related Posts