जानें क्या बच्चों में होने वाली क्रूप डिजीज और इसके लक्षण


जानें क्या बच्चों में होने वाली क्रूप डिजीज और इसके लक्षण

क्रूप डिजीज बच्चों में होने वाली श्वास संबंधी एक आम समस्या है। क्रूप डिजीज, कंठ और श्वास नली और फेफड़ों की ओर जाने वाली श्वास नलियों में सूजन और सिकुड़न के कारण होती है जिसके कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। क्रूप डिजीज मुख्य तौर पर पैराइनफ्लूएंजा वायरस के संक्रमण के कारण होती है लेकिन कभी कभी यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण भी हो सकता है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो पीड़ित से दूसरों तक फ़ैल सकती है। यह समस्या 6 माह से 3 साल तक के बच्चों में ज़्यादा देखने को मिलती है। हालाँकि, कई बार बड़े बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो सकते हैं। क्रूप डिजीज में अक्सर छोटे बच्चों में रात के समय या बच्चे के रोने पर खांसी और कफ  की समस्या ज़्यादा तीव्र हो सकती है। क्रूप डिजीज कोई गंभीर बीमारी नहीं है और यह दवाई और देखभाल से ठीक भी हो जाती है लेकिन नज़रअंदाज़ करने पर समस्या बढ़ भी सकती है। 


अधिकांश मामलों में क्रूप डिसीज की शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही होती हैं। लेकिन जब कफ और सूजन बढ़ जाती है तो बच्चा एक अजीब सी आवाज में खांसने लगता है। यह आवाज तेज और किसी जानवर के भौंकने जैसी सुनाई देती है। यह खांसी रात में या बच्चे के रोने पर और भी ज़्यादा बढ़ सकती है। खाँसी और कफ के कारण बच्च को सांस लेने में भी तकलीफ और बेचैनी होती है और उसकी नींद में भी बाधा आ सकती है।


क्रूप डिजीज के लक्षण 

इस बीमारी के लक्षण 6 माह से 3 साल तक की उम्र तक के बच्चों में ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिलते हैं। लेकिन कई बार बड़े बच्चों को भी ये शिकार बना सकते हैं। क्रूज़ डिजीज में मुख्य तौर पर ये लक्षण शामिल हैं-

सर्दी-जुकाम

नाक बहना या नाक बंद होना 

भौंकने जैसे आवाज़ वाली खांसी 

बुखार

गले में सूजन और दर्द

साँस लेने में तकलीफ या तेज-तेज साँस लेना

ज्यादा गंभीर मामलों में ओठों के आस-पास ऑक्सीजन की कमी से नीलापन आना


इलाज 

साधारण क्रूप डिजीज में बच्चे की घर में देखभाल से ही यह समस्या ठीक हो सकती है। वहीं, मध्यम से गंभीर क्रूप डिजीज में डॉक्टर कुछ स्टेरॉयड दे सकते हैं जिससे श्वास नली में सूजन कम हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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