वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा! हल्दी खाने से कम हो सकता है अल्जाइमर रोग का खतरा


वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा! हल्दी खाने से कम हो सकता है अल्जाइमर रोग का खतरा

वर्तमान समय में अल्जाइमर रोग से ग्रसित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. अल्जाइमर रोग में मरीज को किसी भी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद रखने में परेशानी महसूस होती है और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी दिक्कत महसूस होती है। अल्जाइमर पर दुनियाभर में कई शोध हो चुके हैं जिनमें शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के एमिलॉइड बीटा और मानसिक रोग में संबंध का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि एमिलॉइड बीटा अल्जाइमर रोग का सबसे बड़ा कारक है। मस्तिष्क में इसका स्तर बढ़ने से अल्जाइमर से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर रोग के मरीजों के लिए आशा की एक नई किरण पेश की है.


जर्नल ऑफ अल्जाइमर डिसीज में छपे शोध के मुताबिक वैज्ञानिकों ने विटामिन डी 3 द्वारा विनियमित विशिष्ट इंट्रासेल्युलर तंत्र की पहचान की है जो शरीर को एमाइलॉइड बीटा के मस्तिष्क को साफ करने में मदद कर सकता है। मुख्य अध्ययन लेखक, डॉ मिलन फियाला ने कहा कि, "इस नए अध्ययन में शामिल प्रमुख तंत्रों को स्पष्ट करने में मदद मिली है, जो अल्जाइमर रोग के संभावित उपचारों के रूप में विटामिन डी 3 और करक्यूमिन की उपयोगिता को बेहतर ढंग से समझने में हमारी मदद करेगा।"

 

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अल्जाइमर पर हुए शोधों में यह बात भी सामने आई है कि विटामिन डी और हल्दी में पाए जाने वाले ‘करक्यूमिन' से इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.करक्यूमिन हल्दी में पाया जाने वाला एक रासायनिक कंपाउंड है. करक्यूमिन में एंटीआक्सीडेंट और ऑक्सीकरण-रोधी गुण होते हैं जो मस्तिष्क की सूजन कम कर अल्जाइमर रोग से बचाव करते हैं। यही कारण है कि भारत में बूढ़े-बुजुर्ग अल्जाइमर की चपेट में कम आते हैं। उनकी याददाश्त भी तुलनात्मक रूप से अच्छी होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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