माइग्रेन, लकवा समेत कई बीमारियों में प्रभावी है यूनानी कपिंग थेरेपी, जानिए प्रकार और प्रक्रिया


माइग्रेन, लकवा समेत कई बीमारियों में प्रभावी है यूनानी कपिंग थेरेपी, जानिए प्रकार और प्रक्रिया

यूनानी कपिंग थेरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है।  यह कई तरह के रोगों के इलाज में कारगर है। थैरेपी  इसे अरबी में हिजामा, अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण के नाम से जाना जाता है। यूनानी कपिंग थैरेपी में में त्वचा पर एक वैक्युम कप लगाया जाता है जो त्वचा को अंदर की ओर खींचता है। इससे शरीर से दूषित खून इकट्ठा हो जाता है, जिसे निकालकर बीमारी को दूर किया जाता है। 


इस चिकित्सा में शरीर के जिस हिस्से पर बीमारी की पहचान होती है, वहां शीशे के छोटे-छोटे कप लगाकर वैक्यूम पैदा किया जाता है। इससे कप शरीर से चिपक जाता है। कपिंग करने के तीन से पांच मिनट बाद दूषित खून जमा हो जाता है। जमा हुए गंदे खून को शरीर से निकाल दिया जाता है। इससे नए खून का निर्माण होता है और कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। 


कपिंग थेरेपी 2 प्रकार की होती है -

ड्राई कपिंग 

इस प्रक्रिया में गर्म कप या पंप लगे हुए पंप को सीधे प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है। गर्मी या पंप द्वारा बनाए वैक्यूम से त्वचा को ऊपर उठाया जाता है। 


वेट कपिंग 

इस प्रकिया में ड्राई कपिंग की तरह सक्शन बनाया जाता है लेकिन लाल धब्बों को लाने के लिए 3 मिनट के बाद इस कप को हटा दिया जाता है। शरीर से दूषित रक्त को निकालने के लिए इस पैच पर छोटे चीरे लगाए जाते हैं।


इन बीमारियों में प्रभावी

यूनानी कपिंग थैरेपी के जरिए माइग्रेन, जॉइंट पेन, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल डिस्क, पैरों में सूजन, सुन्ना होना और झनझनाहट, हर प्रकार का दर्द, सायटिका, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग धब्बे और गंजेपन जैसी समस्याओं का इलाज संभव है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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