जानिए कोरोना वायरस से संबंधित फैलाई जा रही अफवाहों का सच


जानिए कोरोना वायरस से संबंधित फैलाई जा रही अफवाहों का सच
कोरोना वायरस जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रखा है, 2 लाख लोगों की जान ले चुका यह वायरस थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। भारत में इस महामारी का असर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा हैं। अब तक कुल 27 हजार से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 830 से ज्यादा लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। एक अच्छी खबर यह है कि इस वायरस से अब तक तकरीबन 8 हजार से ज्यादा लोग ठीक होकर अपने  घर वापस जा चुके हैं। भारत में 3 मई तक लॉक डाउन है। सभी लोग अपने घरों में रहकर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं।

दुनिया भर के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और डॉक्टर इस वायरस का तोड़ निकालने में लगे हुए है, पर अभी तक इस वायरस का टीका नहीं मिल पाया हैं। एक तरफ जहां लोग अपने घरों में रहकर वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे बुद्धिजीवी और मूर्ख हैं जो सोशल मीडिया पर अपना काम कर रहे हैं। यह लोग सोशल मीडिया के जरिए लोगों के बीच अफवाहें फैला कर उन्हें भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। आज हम आपको इस कोरोना वायरस से जुड़ी सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से फैलाई जा रही अफवाहों के सच से अवगत कराएंगे जिन्हें आपका इस महामारी में जानना बेहद जरूरी है।

1. क्या गर्मी में या ज्यादा तापमान पर कोरोना वायरस खत्म हो जाता है ?
नहीं, गर्मी में या ज्यादा तापमान होने पर कोरोना वायरस नष्ट नहीं होता। जब यह कोरोना वायरस दुनिया में फैला तो लोगों का कहना था कि यह वायरस गर्मी में या ज्यादा तापमान पर खत्म हो जाता है क्योंकि जो देश ज्यादा ठंडे, जिनमें बर्फबारी या जिनका तापमान कम रहता है यह वायरस वहां ज्यादा तेजी से फैलता हैं, पर इस बात में कोई भी सच्चाई नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यह साफ कहा है कि इस वायरस का सर्दी या गर्मी से कोई लेना देना नहीं हैं। थाईलैंड, इंडोनेशिया  और मलेशिया आदि जैसे देश जहां पर तापमान ज्यादा रहता है वहां पर भी इस वायरस का संक्रमण हुआ हैं। इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि धूप में रहने या 25 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में इस वायरस का संक्रमण नहीं होगा। WHO ने साफ कहा है कि अपने हाथ लगातार साबुन से या सैनिटाइजर से साफ करते रहें करते रहें और अपने आंख,मुंह और नाक पर लगाने से बचें।

2. क्या 5G मोबाइल नेटवर्क  से फैलता है कोरोना?
नहीं, इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि 5G से कोरोना फैलता है। विश्व स्वास्थ्य ससंगठन (WHO) ने यह साफ कहा है कि यह वायरस इंसान के सांस लेने पर फेफड़ों पर जाकर असर करता है ना की यह वायरस किसी मोबाइल नेटवर्क या रेडियो वेव्स के जरिए फैलता हैं। किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के खासने या छींकने  पर या किसी ऐसी वस्तु को छूना जिस पर यह वायरस है उससे यह वायरस फैलता हैं। यह वायरस उन सभी देशों में आया है जहां पर 5G नहीं हैं।

3. क्या इस वायरस से ठीक हो जाने के बाद भी यह वायरस जिंदगी भर उस व्यक्ति के साथ रहता है?
नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बात से साफ नकारा है कि जो करना संक्रमित व्यक्ति इस वायरस से ठीक हो चुका है यह वायरस जिंदगी भर उसके साथ रहेगा। हालांकि यह सत्य है कि ठीक हो जाने के बाद भी यह वायरस उस व्यक्ति को दोबारा संक्रमित कर सकता हैं।

4. क्या एंटीबायोटिक्स कोरोनोवायरस के उपचार और रोकथाम में प्रभावी हैं?
WHO का कहना है कि कोई भी एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया के खिलाफ काम करता है ना कि वायरस के खिलाफ। कोरोना वायरस जो कि एक प्रकार का वायरस इनफेक्शन है इसलिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग  इसके रोकथाम या उपचार के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।हालांकि अगर आप कोरोना से संक्रमित हैं और अस्पताल में भर्ती हैं तो आपको एंटीबायोटिक्स दी जा सकती है जिससे आपको बैक्टीरिया इन्फेक्शन ना हो।

5. क्या कोरोनोवायरस को मारने में हाथ सुखाने वाला हैंड ड्रायर प्रभावी है?
नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने साफ किया है कि कोरोनावायरस के खिलाफ अपने आप को बचाने के लिए आपको अपने हाथों को अक्सर एल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र से साफ करना चाहिए या उन्हें  साबुन से धोना चाहिए। अपने हाथों को साफ करने के बाद आप अपने हाथ को सुखाने के लिए हैंड ड्रायर या तौलिया का उपयोग कर सकते हैं।

6. क्या निमोनिया का टीका कोरोनावायरस से बचाता है?
नहीं, निमोनिया वैक्सीन जैसे न्यूमोकोकल वैक्सीन और हीमोफिलस इनफ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन कोरोना के खिलाफ सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं।
यह वायरस इतना अलग है कि इसे इसके टीके  से ही मारा जा सकता है। दुनिया भर के शोधकर्ता इसका के शोधकर्ता इसका टीका विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

7. क्या अल्ट्रावायलेट डिसइन्फेक्शन लैंप कोरोनोवायरस को मार सकता है?
नहीं, अल्ट्रावायलेट किरणों का उपयोग कभी भी कोरोना वायरस को मारने में नहीं करना चाहिए।भूल से भी यूवी किरणों का उपयोग हाथों को साफ या निष्फल करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये किरणें बहुत खतरनाक और हानिकारक होती हैं जिससे स्किन कैंसर या जलन भी हो सकती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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