Mental Health Tips: Social Media की 'Perfect Life' छीन रही है सुकून? Depression और Anxiety का बन रही वजह

  • अनन्या मिश्रा
  • Mar 31, 2026

Mental Health Tips: Social Media की 'Perfect Life' छीन रही है सुकून? Depression और Anxiety का बन रही वजह

आजकल हम सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन चेक करते हैं। फोन स्क्रॉल करते हुए हमारी नजर कभी किसी राजनीतिक विवाद पर पड़ती है, तो कभी नफरत कमेंट्स या कभी किसी हादसे की खबर पर। हम जाने-अंजाने में पूरा दिन इस निगेटिविटी से घिरे रहते हैं। हालांकि आपको लगे कि यह सिर्फ एक पोस्ट है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका दिमाग इसको एक खतरे की तरह देखता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सोशल मीडिया की निगेटिविटी कैसे हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।


स्ट्रेस हार्मोन

जब आप लगातार दुख भरी खबरें, हिंसा और गुस्से वाली खबरें देखते हैं। तो हमारा दिमाग कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करने लगता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली निगेटिविटी दिमाग को संकेत देती है कि हम किसी खतरे में है, जिस कारण हम हर समय घबराहट या तनाव महसूस करते हैं।


डूमस्क्रॉलिंग की आदत

अगर आप बुरी खबरें देख रहे हैं और चाहकर भी नहीं रुक पा रहे हैं, तो इसको डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। बुरी खबरों को हमारा दिमाग ज्यादा अहमियत देता है। जिससे कि हम सतर्क रह सकें। लेकिन सोशल मीडिया पर यह एंडलेस साइकिल बन जाता है, जिससे सिरदर्द, नींद की कमी और मानसिक थकान होने लगती है।


कंपेरिजन और हीन भावना

बता दें कि नकारात्मकता सिर्फ खबरों तक की सीमित नहीं होती है। दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर खुद को उनसे कम आंकना भी निगेटिव अनुभव है। जब आप अपनी की तुलना दूसरों के फिल्टर वाली जिंदगी से करते हैं। तो हमारे अंदर जलन और लो सेल्फ एस्टीम पैदा होती है। धीरे-धीरे यह डिप्रेशन का भी रूप ले सकती है।


रेज बेटिंग का ट्रेंड

सोशल मीडिया पर आजकल रेज बेटिंग का ट्रेंड काफी चल रहा है। इसमें ऐसा कंटेंट जानबूझकर बनाया जाता है, जिससे आपको गुस्सा आए और आप इस तरह के पोस्ट पर कमेंट करें। एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए लोग ऐसा कंटेंट बनाते हैं। जिस कारण आपको गुस्सा आता है, स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है और बीपी बढ़ता है।


अन्य गंभीर असर

लगातार बदलती और निगेटिव जानकारी हमारे अटेंशन को कम कर देती हैं। जिस कारण हम किसी एक काम पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाते हैं।


जब हम सोशल मीडिया पर रोजाना बहुत सारी हिंसा या फिर दुखद कंटेंट देखते हैं। तो हमारा दिमाग उनकी तरफ सुन्न हो जाता है। वहीं हम दूसरों के दुख के लिए संवेदनहीन होने लगते हैं।


सोशल मीडिया पर नफरत भरे शब्द और बहस आदि हमारे व्यवहार में दिखने लगते हैं। जिस कारण हम छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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