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Blood Pressure: Lifestyle की गलतियां बना रहीं बच्चों को BP का मरीज, जानें क्या है Blood Pressure का Safe Level

By Healthy Nuskhe | Feb 03, 2026

अगर आप भी शरीर को सेहतमंद बनाए रखना चाहते हैं, तो इसके लिए जरूरी है कि आप ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों को कंट्रोल में रखें। क्योंकि ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों का अक्सर बीपी हाई रहता है, उनको तंत्रिकाओं, आंखों और किडनी से संबंधित दिक्कतें होने का खतरा रहता है। वहीं यह हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक जैसी समस्याओं की वजह बन सकती है।

हाई बीपी को हेल्थ एक्सपर्ट 'साइलेंट किलर' भी कहते हैं। क्योंकि इसके लक्षण लंबे समय तक सामने नहीं आते हैं। यह अंदर ही अंदर शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। गलत खानपान, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, तनाव और नींद की अनियमितता की वजह से हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बीपी का नॉर्मल रेंज कितनी होनी चाहिए और कब आपको सावधान होने की जरूरत होती है।

हाई बीपी की समस्या

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो बीपी वह दबाव है, जो ब्लड सर्कुलेशन के दौरान हमारी रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर पड़ता है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में व्यक्ति को इस समस्या का तब तक पता नहीं चलता है, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए।

वहीं समय रहते इनके लक्षणों को पहचान करना और साथ ही इसको कंट्रोल करने के उपाय करना चाहिए। जिससे कि दिल, दिमाग, आंखों और किडनी को होने वाले स्थायी नुकसान से बचा जा सके।

इसके नियमित अंतराल पर अपने बीपी को चेक करते रहें। ऐसे में आइए जानते हैं इसकी रीडिंग कितनी होनी चाहिए।

कितनी होनी चाहिए बीपी रीडिंग

बता दें कि 18 साल से अधिक के लोगों के लिए सामान्य बीपी 120/80 mmHg माना जाता है।
छोटे बच्चे, जिनकी उम्र 5 से 12 साल के बीच है, उनका बीपी करीब 90/60 से 110/70 mmHg के बीच होना चाहिए।
बच्चों में बीपी लंबाई, उम्र और वजन पर निर्भर करता है।
इसी तरह से वयस्कों की शारीरिक स्थिति और वेट के हिसाब से ब्लड प्रेशर की रीडिंग अलग हो सकती है।
अगर इससे ज्यादा की रीडिंग लंबे समय तक बनी रहती है, तो आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

बच्चों के क्यों जरूरी बीपी की जांच

हेल्थ एक्सपर्ट ने एक अध्ययन में पाया कि उम्र बढ़ने के साथ हृदय रोगों की समस्या से बचे रहने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से बच्चों के बीपी की जांच की जाती रहे।

वहीं नए अध्ययन में पाया गया है कि 10 साल के कम उम्र के बच्चों में भी हाइपरटेंशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वहीं 7 साल के बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या थी। इनमें 50 साल की उम्र तक हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा 50% तक ज्यादा था। यानी की अगर कम उम्र से ही ब्लड प्रेशऱ पर ध्यान दिया जाए, तो यह भविष्य में हृदय संबंधित खतरों को कम करने में सहायक हो सकती है।
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