इन वजहों से हो सकती है मिर्गी की समस्या, जानें इससे बचाव के उपाय


इन वजहों से हो सकती है मिर्गी की समस्या, जानें इससे बचाव के उपाय
मिर्गी एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है।  इसमें मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती हैं। जब मस्तिष्क में न्यूरॉन्स से सही तरह से सिग्नल नहीं मिल पाता है तब मस्तिष्क के काम में दिक्कत आना शुरू हो जाती है। इस वजह से व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ने लगता है और उसे बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। मिर्गी के दौरों में तरह-तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं - जैसे कि बेहोशी आना, शरीर का अकड़ जाना, गिर पड़ना और हाथ-पांव में झटके आना। मस्तिष्क पर असर कई कारणों से पड़ कई सकता है, जैसे-

जेनेटिक
जीन्स में गड़बड़ी होने पर व्यक्ति मिर्गी से पीड़ित हो सकता है।

इन्फेक्शन
यदि जन्म के समय बच्चे को पीलिया हो गया हो या फिर उसके ब्रेन तक किसी इन्फेक्शन की वजह से उसके मस्तिष्क में पूरी ऑक्सिजन ना पहुंच पाई हो तो मिर्गी की समस्या हो सकती है।

सिर पर चोट
सिर पर किसी प्रकार की चोट लगने के कारण व्यक्ति मिर्गी से पीड़ित हो सकता है।  

स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर
ब्रेन स्ट्रोक या ट्यूमर भी मिर्गी का कारण बन सकता है।

गर्भ में चोट

यदि मां के गर्भ में ही बच्चे को किसी तरह की चोट लग गई हो तो होने वाले बच्चे को मिर्गी की शिकायत हो सकती है।

ब्रेन टीबी
यदि किसी व्यक्ति को दिमाग की टीबी हो गई हो तो भी उसे मिर्गी की शिकायत हो सकती है।

न्यूरोलॉजिकल डिज़ीज

न्यूरोलॉजिकल डिज़ीज  जैसे अल्जाइमर रोग के कारण भी व्यक्ति मिर्गी का शिकार हो सकता है।  

नशीले पदार्थों का सेवन

ड्रग एडिक्शन और एन्टीडिप्रेसेन्ट के ज्यादा इस्तेमाल से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण मिर्गी हो सकती है।  


मिर्गी से बचाव -

खान-पान का रखें खास ख्याल
मिर्गी से बचाव के लिए खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए।  मिर्गी से बचाव के लिए संतुलित आहार लें।  मिर्गी के रोग में ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला खाना लेना चाहिए। इसके अलावा अपने आहार में फल और हरी सब्जियाँ शामिल करें।  

डॉक्टर की सलाह है जरूरी
मिर्गी के रोग में अपनी नियमित जाँच करवाते रहें और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सेवन सही तरह से करें।  मिर्गी के रोग के उपचार के लिए डॉक्टर एन्टी एपिलेप्टिक ड्रग थेरपी और सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।  

तनाव से बचें

मिर्गी के रोग से बचने के लिए अधिक तनाव से बचें और अपनी दिनचर्या में व्यायाम आदि शामिल करें।  जितना हो सके खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें।    

ये घरेलु उपचार हैं भी हैं फायदेमंद -  

तुलसी
तुलसी के चमत्कारी औषधीय गुणों के बारे में तो आप जानते ही होंगे।  तुलसी में काफी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक रखने में मदद करते हैं।  रोजाना 20 तुलसी के पत्ते खाने से मिर्गी के दौरे से छुटकारा मिल सकता है।  इसके अलावा मिर्गी का दौरा पड़ने पर तुलसी का रस और सेंधा नमक मिलाकर रोगी के नाक में डालें।

सफेद प्याज
सफेदप्याज का सेवन मिर्गी के रोग में फायदेमंद साबित हो सकता है।  रोजाना एक चम्मच सफेद प्याज के रस का सेवन करने से मिर्गी की समस्या में काफी हद तक आराम मिल सकता है।  

शहतूत और अंगूर का रस
शहतूत और अंगूर का रस मिर्गी के रोगी के लिए काफी फायदेमंद होता है।  रोजाना सुबह शहतूत और अंगूर का रस पीने से मिर्गी की समस्या में जल्द लाभ होगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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