Diabetes और High BP के मरीजों में बढ़ा Kidney Disease का खतरा, इन संकेतों पर रखें नजर
- अनन्या मिश्रा
- Sep 19, 2026

अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी की वजह से कई बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। कम उम्र के लोग ही बीपी-शुगर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिसका असर शरीर के अन्य जरूरी अंगों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि तेजी से युवा आबादी भी किडनी की समस्याओं का शिकार हो रही है। हमारे शरीर में किडनी बिना थके लगातार काम करती है, खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल को फिल्टर करने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करना जरूरी होता है।
वहीं किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने से शरीर में अपशिष्ट और तरल जमा हो सकता है। जिस कारण सांस फूलने, सूजन, मितली-उल्टी, कमजोरी और भूख कम लगने जैसे दूसरे सेहत संबंधी जोखिम हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अक्सर किडनी की बीमारियां साइलेंटली बढ़ती हैं। वहीं बहुत सारे लोगों को किडनी की बीमारी का पता तब चलता है, जब समस्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी होती है।
अक्सर किडनी संबंधी समस्या को ज्यादा काम, उम्र बढ़ने, नींद की कमी या सामान्य कमजोरी समझा जाता है। यह लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो किडनी हेल्दी रहे और इससे संबंधित आपको कोई समस्या न हो, इसके लिए लाइफस्टाइल और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डायबिटीज और हाई बीपी जैसी स्थितियों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों को एक्स्ट्रा सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं शरीर में दिखने वाले कुछ असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लगातार थकान और कमजोरी लगना
किडनी की कार्यक्षमता में कमी होने पर शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगते हैं। वहीं कई लोगों को किडनी की बीमारी से एनीमिया की समस्या भी हो सकती है। लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन में कमी होने की वजह से कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यही कारण है कि लंबे समय से बनी कमजोरी को सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या समझना ठीक नहीं है।
वैसे तो थकान होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार कमजोरी के साथ-साथ डायबिटीज या हाई बीपी होने पर किडनी की जांच जरूर करानी चाहिए।
पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन आना
किडनी हमारे शरीर से एक्स्ट्रा तरल पदार्थ निकालने में मदद करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तो शरीर में तरल जमा हो सकता है। जिस कारण से पैरों में सूजन और कुछ मामलों में सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।
अगर चेहरे या फिर पैरों-टखनों पर बार-बार सूजन दिख रही है, तो इसको सिर्फ ज्यादा देर तक खड़े रहने या फिर शारीरिक मेहनत का नतीजा नहीं मानना चाहिए।
कई बार यह सूजन लिवर, दिल या दूसरी स्थितियों में भी हो सकती है, इसलिए इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेशाब में बदलाव होना
किडनी की बीमारी होने पर पेशाब में बदलाव होना महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। लेकिन हर बदलाव किडनी की बीमारी हो ऐसा भी जरूरी नहीं होता है। रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, बार-बार पेशाब आना या फिर पेशाब में असामान्य बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं।
शुरूआत में किडनी की बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती है। इसलिए पेशाब सामान्य दिखने से किडनी को स्वस्थ मानना सही नहीं है। अलग लगातार पेशाब में बदलाव दिख रहा है, इसके साथ ही हाई बीपी और डायबिटीज की समस्या है, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराना चाहिए।
इन समस्याओं पर रखें नजर
जब किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं। जिस कारण मितली और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी की कार्यक्षमता के कम होने पर बॉडी में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो सकता है। जिसकी वजह से सांस फूलने और पैरों में सूजन जैसी समस्या आ सकती है।
किडनी बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ शरीर के संकेतों के भरोसे रहना ठीक नहीं है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।