G6PD Deficiency: शरीर दे रहा है ये 5 संकेत तो हो जाएं अलर्ट, सीधा Blood पर होता है असर

  • अनन्या मिश्रा
  • Apr 03, 2026

G6PD Deficiency: शरीर दे रहा है ये 5 संकेत तो हो जाएं अलर्ट, सीधा Blood पर होता है असर

हमारा शरीर स्वस्थ रहे और सभी अंग सही तरीके से काम करते रहें, इसके लिए ब्लड सर्कुलेशन ठीक तरीके से होते रहना जरूरी होता है। ब्लड के जरिए सभी अंगों तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचता है। लेकिन कुछ स्थितियों में खून की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। जी6पीडी डिफिशिएंसी एक ऐसी स्थिति है, जिसको लेकर सभी लोगों को जागरुक होने की जरूरत है। जी6पीडी एक तरह का एंजाइम है, जो रेड ब्लड सेल्स को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। शरीर में इसकी कमी होने पर लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से डैमेड होने लगती हैं।


यह रक्त कोशिकाएं ही फेफड़ों से पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का काम करती है। शरीर में इसकी कमी होने पर खून की कमी या एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि जी6पीडी की कमी एक जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता से विरासत में मिलती है। इस कारण से आपका जी6पीडी लेवल कम हो जाता है। इसका खतरा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है।


जी6पीडी की कमी होने पर खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जी6पीडी की कमी होना काफी आम होता है। दुनियाभर में करीब 40 से 50 करोड़ लोग इस समस्या से प्रभावित हैं।

अधिकतर लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। इसलिए समय रहते पहचान नहीं हो पाती है।

कुछ दवाओं जैसे ट्रिगर की वजह से हीमोलिटिक एनीमिया जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।

इसमें कई सारे रेड ब्लड सेल्स क्षतिग्रस्त होकर डेड होने लगते हैं।

जी6पीडी की कमी होने पर नए जन्मे बच्चों में गंभीर पीलिया हो सकती है।


हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो जी6पीडी की कमी होने पर आमतौर पर कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। जब तक कि कोई ट्रिगर आपके रेड ब्लड सेल्स पर दबाव न डाले और उनके टूटने की वजह न बने।


जी6पीडी की कमी की पहचान

दिल की धड़कन का तेज होना

सांस लेने में समस्या

पेशाब का रंग गहरा पीला या फिर नारंगी होना

अक्सर थकान और कमजोरी महसूस होना

जब ऊपर बताए गए लक्षण तेज और गंभीर होते हैं, तो इसको हीमोलिटिक क्राइसिस कहा जाता है।


क्यों होती है जी6पीडी की कमी

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक फवा बीन्स खाना सबसे आम ट्रिगर हो सकता है। अगर जी6पीडी की कमी वाला व्यक्ति फवा बीन्स का सेवन करता है, तो उसको हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है।


टाइफाइड बुखार, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी और निमोनिया की वजह से भी यह ट्रिगर होता है।


शराब और स्मोकिंग भी आपके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।


ऐसे ठीक करें ये समस्या

बता दें कि जिन मरीजों को सीबीसी टेस्ट बार-बार लो रहता है। तो उनमें जी6पीडी की कमी को चेक करने के लिए डॉक्टर टेस्ट कर सकते हैं।


वैसे तो इसकी कमी का कोई इलाज नहीं हैं, लेकिन इसको ट्रिगर करने वाली चीजों से बचाव करके आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं। वहीं जिन लोगों को पीलिया की समस्या होती है, उनको डॉक्टर दवा और अन्य उपचार दे सकते हैं।


जी6पीडी की कमी वाले लोगों को कभी पता नहीं चलता क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन जिनका ब्लड काउंड हमेशा कम रहता है, उनको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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