बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है उपवास


बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है उपवास

उपवास रखना वैसे तो एक आस्था का प्रश्न है। अलग−अलग धर्मों के लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपवास या व्रत रखते हैं और ईश्वर की अराधना करते हैं। वहीं अगर इसे साइंटिफिक नजरिए से देखें तो ऐसा करने से उनकी सेहत को भी काफी लाभ होता है। जी हां, उपवास रखना सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

बॉडी डिटॉक्सीफिकेशन

आमतौर पर लोग दिनभर उल्टा−सीधा खाते हैं, लेकिन जब आप व्रत रखते हैं तो आपके शरीर द्वारा कोई भोजन नहीं खाया जाता है। ऐसे में शरीर में मौजूद फैट ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इतना ही नहीं, एक दिन भोजन स्किप करने और केवल जल या लिक्विड पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।


बेहतर मानसिक स्वास्थ्य

आपको शायद पता न हो लेकिन उपवास आपके शरीर के साथ−साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है। उपवास के बाद, ब्लड में एंडोर्फिन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह आपको एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। उपवास का प्रभाव व्यायाम की भांति ही होता है।

कम करें वजन

अगर आप सप्ताह में एक या दो बार उपवास रखते हैं तो इससे आपको भीतर ही भीतर काफी लाइट फील होता है। इतना ही नहीं, इससे वजन कम करने में भी सहायता मिलती है। उपवास के दौरान आपका शरीर फैट को एनर्जी में तब्दील करता है, जिससे धीरे−धीरे आपका वजन कम होने लगता है। इसके अतिरिक्त इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी बूस्टअप होता है। बस आप इस बात का ध्यान रखें कि अन्य दिन भी आप संतुलित आहार ही लें। वैसे उपवास के कारण समय के साथ−साथ खानपान की आदतों में भी सुधार आता है और फिर व्यक्ति ओवरईटिंग भी नहीं करता। इस तरह उपवास रखने की आदत से आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं।

 

हेल्दी इंटस्टाइन

अगर आप अपनी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो उपवास अवश्य रखें। उम्र के साथ−साथ व्यक्ति के इंटस्टाइल स्टेम सेल्स की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, लेकिन उपवास के दौरान, कोशिकाएं ग्लूकोज के बजाय फैटी एसिड को तोड़ देती हैं और इससे कोशिकाओं को रिजनरेटिव बनने में मदद मिलती हैं।

 

बेहतर हीलिंग प्रोसेस

उपवास करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे शरीर में हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। दरअसल, जब भोजन पेट में मौजूद नहीं होता है, तो शरीर पाचन के बजाय अन्य महत्वपूर्ण कार्यों जैसे चयापचय गतिविधि और प्रतिरक्षा प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करता है। कई रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि हुई है। यहां तक कि एथलीटों को प्रशिक्षण के दिनों में उपवास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि अतिरिक्त वसा को बहाया जा सके और मांसपेशियों की वृद्धि को अनुकूलित किया जा सके।

 

मिताली जैन

 

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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