कोरोनावायरस के भारत में दस्तक देते ही किस तरह एक्टिव हुई मोदी सरकार


कोरोनावायरस के भारत में दस्तक देते ही किस तरह एक्टिव हुई मोदी सरकार
चीन के वुहान प्रांत से कोरोना के संक्रमण की उत्पत्ति हुई 7 जनवरी 2020 को यहीं से पहला मामला सामने आया। लेकिन इस वायरस के खौफ को विश्व भर में फैलने में देर नहीं लगी। आज हालत ये है कि 20 से अधिक देश कोरोना से जूझ रहे हैं। परंतु कोरोना संक्रमण जब स्प्रेड होना शुरू हुआ तो कई देशों ने इसे गंभीरता पूर्वक नहीं लिया, उसके उलट कोरोना वायरस ने सभी देशों को गंभीरता से ले लिया, और अंतरराष्ट्रीय आवरण में पहुंच गया। ऐसे में भारत में मौजूदा मोदी सरकार कोरोना पर शुरुआत से अभी तक कितनी गंभीर रही इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है।

कोरोना के मामले सामने आते ही दिखाई तत्परता
नए साल की शुरुआत विश्व भर के लिए अच्छी साबित नहीं हुई ऐसे में जब चीन से 7 जनवरी को कोरोनावायरस का मामला सामने आया था उसके बाद इस वायरस की गंभीरता को समझते हुए भारत ने ठोस कदम उठाते हुए 8 जनवरी को ही भारतीय विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक की और कोरोना से जुड़े तमाम मसलों पर चर्चा की।

भारत में मौजूद चीनी नागरिकों की कराई जांच
सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए 17 जनवरी से ही भारत में मौजूद चीनी यात्रियों और नागरिकों की यात्राओं का विवरण निकालते हुए, उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। जिनमें कोरोनावायरस के हल्के भी लक्ष्मण नजर आए उन्हें तुरंत आइसोलेट किया गया। कोरोना को लेकर 25 जनवरी को उच्च स्तरीय बैठक की गई। प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित की।

मास्क और पीपीई के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध
भारत सरकार ने 29 जनवरी से ही मास्क और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट पर पूरी तरह से निर्यात प्रतिबंध लगा दिया। कोरोना वायरस से बचने के लिए किट और मास्क की पर्याप्तता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया।

जांच के लिए लैब का प्रबंध
30 जनवरी को केरल राज्य से पहला मामला कोरोना पॉजिटिव होने का आया। जिसके बाद सरकार ने कोरोना वायरस के परीक्षण के लिए तैयारी बनाते हुए शुरुआत में 6 लैब बनाई। धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी परीक्षण के लिए लैब का निर्माण किया गया। 31 जनवरी से अलग-अलग स्थानों में क्वारंटीन सेन्टर्स बनाए गए।

विदेश से लोगों को लाने रेस्क्यू प्लान और स्थिति से निपटने का खाका तैयार किया
कोरोना वायरस की गंभीरता को समझते हुए 1फरवरी को भारत ने विदेशों में फंसे भारतीयों को रेस्क्यू कर वापस हिंदुस्तान लाने का प्लान तैयार किया। वहीं स्थिति से निपटने के लिए 3 फरवरी को मंत्रिमंडल का समूह गठित किया, चीनी नागरिकों को ई- वीजा की सुविधा निलंबित की गई।

केरल में मामले बढ़ने पर जांच करने की बढ़ाई गई प्रक्रिया
7 फरवरी को केरल में कोरोना से 1 से बढ़कर 3 पॉजिटिव मामले सामने आते ही सरकार ने जांच की प्रक्रिया को बढ़ाते हुए डेढ़ लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कराई। विदेशी से आने वाले लोगों को ट्रैक किया उनके आइसोलेशन की व्यवस्था की। जिससे इनके द्वारा अन्य करोड़ों लोगों को संक्रमित होने से बचाया जा सके। 22 से 24 फरवरी के बीच विदेशों से आने वाले लोगों के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग की सुविधा एयरपोर्ट पर तैनात की गई ताकि भारत में कोरोना का संक्रमण लेकर कोई प्रवेश ना कर सके। वियतनाम, इटली, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल, इंडोनेशिया और यूरोपीय कंट्रीज की यात्रा करने से लोगों को हिदायत दी गई।

किसी भी प्रकार के आयोजनों को न करने की अपील की गई
मार्च महीने के शुरुआती दिनों में ही भारत में कोरोना के 6 मामलों की पुष्टि होने के बाद यूनिवर्सल स्क्रीनिंग शुरू की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से किसी भी प्रकार के आयोजन जिसमें भीड़ इकट्ठी हो ना करने की अपील की। होली पर होने वाले कार्यक्रमों को रद्द करने के लिए कहा गया।

होली के त्यौहार के दौरान भी लिए गए बड़े फैसले
भारत सरकार ने होली के त्यौहार के दौरान भी 7 से 12 मार्च के बीच कई बड़े फैसले लिए। जिसमें मुफ्त वीजा प्राप्त देशों की यात्रा को पूरी तरह 15 अप्रैल तक प्रतिबंधित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी स्वयं मामलों की समीक्षा करते रहे ट्वीट के जरिए लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास किया। क्वारंटीन के दिशा-निर्देशों को जारी किया। लैब की संख्या दिनों दिन बढ़ाई गई। 14 मार्च को को रोना संक्रमण के परीक्षण के लिए 52 लैब पूरे देश भर में तैयार की गईं।

प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन
19 मार्च को रात 8.00 बजे भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन देते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आवाहन किया और इसी दिन से अंतरराष्ट्रीय गानों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।
21 मार्च को 75 जिलों में लाॅकडाउन रहा।जबकि 22 मार्च को प्रधानमंत्री के आवाहन का पूरी तरह से भारतीय नागरिकों ने पालन किया व जनता कर्फ्यू के रूप में सभी अपने घरों में रहे।सभी ट्रेनें जो कभी युद्ध काल में भी बंद नहीं हुई उन्हें रोक दिया गया। मेट्रो सेवाओं का संचालन बंद कर दिया गया।

मामलों को बढ़ता देख दोबारा राष्ट्र को किया संबोधित
प्रधानमंत्री मोदी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 24 मार्च को रात 8:00 बजे पुनः देश को संबोधित करते हुए 21 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन की घोषणा कर दी जो 12:00 बजे रात से ही लागू हो गया। प्रधानमंत्री ने मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता को समझते हुए कई जरूरी चीजों के लिए प्रशासन को ढील देने की घोषणा की।

राज्यों के मुख्यमंत्रियों से प्रधानमंत्री की अपील
प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्रियों से निजी तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की जनता को आश्वस्त करने व उन्हें आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के लिए किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना ना करना पड़े इसके लिए अपील की। वर्तमान में कोरौना संक्रमण के 18 सौ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, ऐसे में देश को सुरक्षित रखने के लिए अहम इंतजाम किए जा रहे हैं। वेंटीलेटर्स की सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है ताकि आगे आने वाले कोरोना पाॅजिटिव लोगों को बचाया जा सके।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


Related Posts