Kidney Failure : किडनी से जुड़े इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी


Kidney Failure : किडनी से जुड़े इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

शरीर में दो गुर्दे होते हैं, जो मुख्य रूप से यूरिया, क्रिएटिनिन, एसिड, आदि जैसे नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों को रक्त में से छानने के लिए जिम्मेदार होते हैं इस तरह मूत्र का उत्पादन करते हैं। लाखों लोग विभिन्न प्रकार के गुर्दे की बीमारियों के साथ रह रहे हैं और उनमें से अधिकांश को इसके बारे भनक तक नहीं है। यही कारण है कि गुर्दे की बीमारी को अक्सर एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि अधिकांश लोगों को बीमारी का पता तब तक नहीं चलता जब तक यह उग्र रूप धारण नहीं कर लेता। जबकि लोग अपने रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की नियमित रूप से जांच करवाते रहते हैं, वे अपने गुर्दे की किसी भी समस्या का पता लगाने के लिए अपने रक्त में एक सरल क्रिएटिनिन परीक्षण भी नहीं करवाते। किडनी हमारे शरीर का सबसे जरूरी अंग है। यह मुख्य रूप से यूरिया, क्रिएटिनिन, एसिड जैसे नाइट्रोजनयुक्त वेस्ट मटेरियल उत्पादों से ब्लड को फिल्टर करने के लिए जिम्मेदार होती है। ये सभी टॉक्सिन्स हमारे ब्लैडर में जाते हैं और पेशाब करते समय बाहर निकल जाते हैं।

किडनी खराब होने के लक्षण इतने हल्के होते हैं कि ज्यादातर लोगों को बीमारी के बढऩे तक कोई अतंर महसूस नहीं होता। जब चोट लगने , हाई ब्लड प्रेशर या फिर डायबिटीज के कारण किडनी डैमेज हो जाती हैं, तो यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे जहर का निर्माण होता है। ऐसे में किडनी ठीक से काम नहीं करती और टॉक्सिन जमा हो सकते हैं ।

किडनी खराब होने के लक्षण

सबसे पहले आपको ये बता देते हैं कि किडनी खराब लक्षण के पहले चरण में किडनी के काम करने की क्षमता 90 से 100% तक रहती है इस दौरान eGFR 90 मि.ली. प्रति-मिनिट से ज्यादा रहता है यही कारण है कि इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते हैं लेकिन पेशाब में परेशानियां आने लगती हैं। दूसरे और तीसरे स्टेज में किडनी खराब होने के लक्षण आसानी से महसूस किए जाते हैं इस दौरान पीड़ित व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां होती हैं जैसे-

1. शरीर में खून की कमी

किडनी खराब की पहचान एनीमिया से किया जा सकता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को जल्दी थकान लगने लगती है और शरीर का रंग पीला पड़ने लगता है। आपको बता दें कि एनीमिया व शरीर में खून की कमी किडनी खराब होने के संकेत हैं जो सबसे पहले दिखाई देते हैं और अगर समय रहते इसका इलाज नहीं हुआ तो रोगी की हालत गंभीर हो सकती है।

2. चिड़चिड़ापन

किडनी में खराबी के लक्षण में चिड़चिड़ापन भी शामिल है, इस बीमारी की वजह से पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से वो चिड़चिड़ा हो जाता है। इसके अलावा किडनी की कार्यक्षमता में कमी के कारण पीड़ित व्यक्ति के कमर में दर्द महसूस होता रहता है।

3. शरीर पर सूजन

किडनी खराब होने के लक्षण की बात करें तो इस स्थिति में चेहरे, पेट और पैरों में सूजन आने लगती है। अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई दे और जल्दी ठीक ना हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें खुद से किसी भी तरह का इलाज ना करें क्योंकि ये ज़रूरी नहीं है कि ये सूजन किडनी खराब होने के कारण ही आ रही हो इसके पीछे कोई दूसरी बीमारी भी हो सकती है।

4. उच्च रक्तचाप

Kidney खराब होने के लक्षण में उच्च रक्तचाप भी शामिल है। जिस व्यक्ति का किडनी ठीक ढंग से काम नहीं करता है उसे उच्च रक्तचाप की शिकायत हो जाती है। आपको बता दें कि अगर उच्च रक्तचाप 30 साल से कम उम्र के व्यक्ति को हो या अधिक हो तो समझ जाना चाहिए की ये किडनी खराब होने की पहचान है।

5. वजन बढ़ना

अगर किसी व्यक्ति के शरीर का वजन अचानक ही बढ़ने लग जाए और शरीर में सूजन रहने लगे तो ये किडनी खराब होने की स्थिति हो सकती है। अगर भूख में कमी के बावजूद भी आपका भार तेज़ी से बढ़ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

6. ठंड लगना

शायद आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन अगर किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो रही है तो उसे गर्मी के मौसम में भी ठंड लगने की शिकायत होगी। अगर पीड़ित व्यक्ति का शरीर हमेशा ठंडा रहे और उसे नींद अधिक आए तो समझ जाइए की ये किडनी खराब के लक्षण हैं।

7. भूख में कमी

किडनी खराब होने की पहचान भूख में कमी से भी किया जा सकता है, इस दौरान रोगी को मितली, उलटी, मुँह के स्वाद में बदलाव आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। आपको बता दें कि जब हमारे शरीर में किडनी के काम करने की स्पीड में कमी आ जाती है तो शरीर के भीतर विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ने लगती है जिसकी वजह से भूख में कमी, उल्टी, जी मिचलाने जैसी परेशानियां होती हैं।

8. त्वचा में रैशेज

स्किन पर रैशेज खुजली और लाल पड़ना भी किडनी खराब होने के ही संकेत हैं। आपको बता दें कि ये लक्षण और भी कई बीमारियों में देखने को मिलते हैं लेकिन जब किसी व्यक्ति की किडनी काम करना बंद कर देती है या कम कर देती है तो इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति के शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं जिसकी वजह से खून में गंदगी रहती है और इसका असर त्वचा पर दिखाई देता है। इस स्थिति में स्किन पर रैशेज और खुजली होने लगती है।

9. पेशाब में परेशानी

पेशाब में दिक्कत होना किडनी खराब होने के लक्षण में से सबसे ज़रूरी संकेत है क्योंकि अगर किसी व्यक्ति का किडनी खराब हो रहा है तो सबसे पहले पेशाब में ही बदलाव नजर आता है। इस दौरान रोगी के पेशाब का रंग बदल जाता है और पेशाब की मात्रा में भी कमी आ जाती है, इसके अलावा अधिक पेशाब आना, पेशाब में जलन होना, पेशाब में खून या पस आना और पेशाब का पूरी तरह से रूक जाना भी किडनी खराब होने का लक्षण है।

10. थकान महसूस होना

किडनी रोग में या किडनी खराब होने की स्थिति में रोगी को अधिक थकान महसूस होती है और वो पूरा दिन सोता रहता है। आपको बता दें कि किडनी पीठ के हिस्से की ओर ज्यादा होती है इसलिए अगर किसी व्यक्ति की किडनी में कोई दिक्कत या परेशानी है तो इस स्थिति में पीठ में दर्द अधिक होता है।

किडनी खराब होने के कारण

आज-कल की बदलती जीवनशैली ने न सिर्फ हमारे जीवन में बदलाव किए हैं बल्कि हमारे शरीर और किडनी पर भी इस जीवनशैली के प्रभाव पड़ें हैं। आज के संदर्भ में किडनी की विफतला अधिक देखने को मिल रहीं हैं।

किडनी डैमेज के कई कारण हो सकते हैं जैसे-

- कई तरह की एंटी-बायोटिक दवाएँ, मधुमेह (diabetes) और उच्च रक्तचाप भी किडनी विफलता का मुख्य कारण हैं।

- किडनी में अगर खून का पहुँचना अचानक बंद हो जाए या कमी आ जाए तो किडनी की विफलता का खतरा बढ़ जाता है। खून कम पहुँचने की स्थितियाँ दिल का दौरा पड़ना, दिल की बीमारी, जिगर की विफलता (Heart fail), पानी की कमी, सेप्सिस जैसा कोई गंभीर संक्रमण और उच्च रक्तचाप हैं। या पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) होना।

- मूत्र संबंधी समस्याओं को भी किडनी खराब होने का कारण माना गया है। जब हमारा शरीर मूत्रत्याग नहीं कर पाता तो कई विषाक्त पदार्थ किडनी पर जोर डालते हैं। इससे कभी-कभी ये पदार्थ मूत्र मार्ग और अन्य अंगों को रोक देते हैं जैसे- प्रोस्टेट (पुरुषों में सबसे आम प्रकार), पेट, सर्वाइकल (ग्रीवा), मूत्राशय। के अलावा अन्य स्थितियों में पेशाब में रुकावट हो सकती है जिससे किडनी की विफलता हो सकती है, जिसमें शामिल हैं- पथरी, प्रोस्टेट ग्रंथी का बढ़ना, मूत्र पथ में  रक्त के थक्के जमना।

- ल्यूपस, एक ऑटोइम्यून बीमारी जो शरीर के कई अंगों जैसे - हृदय, फेफड़े, किडनी और मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। यह किडनी में सूजन पैदा कर सकती है जिससे किडनी की विफलता होने का खतरा रहता है।

- मल्टीपल मायलोमा (अस्थि मज्जा में प्लाज्मा कोशिकाओं का एक कैंसर) जैसी बीमारी भी किडनी विफलता का कारण बन सकती है। या किडनी में कोई संक्रमण हो जाना।

- कीमोथेरेपी जैसी इलाज प्रणालियाँ (कैंसर और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज करती हैं) भी किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।


Note : इन दिनों किडनी की बीमारियां काफी बढ़ गई हैं। एक रिसर्च के अनुसार किडनी की बीमारियां और किडनी फेल्योर पूरे विश्व और भारत में खतरनाक रूप ले चुका है। स्थिति इतनी खराब है कि भारत में हर 10 में से करीब 1 इंसान क्रोनिक किडनी की बीमारी से पीड़ित है। इसके अलावा हर साल करीब 1,50,000 लोग किडनी फेल्योर का शिकार हो जाते हैं। इसलिए अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो किडनी के स्वास्थ्य का खास ख्याल रखें औऱ खानपान में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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