अगर आप भी हैं, डायबिटीज पेशेंट तो जानिए टाइप-1 और टाइप-2 से जुड़ी ये अहम जानकारियां


अगर आप भी हैं, डायबिटीज पेशेंट तो जानिए टाइप-1 और टाइप-2 से जुड़ी ये अहम जानकारियां

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान का जीवन एक साथ नहीं समाप्त होता वरन् यह रोग इंसान को घुट घुट कर मरने पर विवश कर देता है। समस्या तो तब और बढ़ जाती है, जब डायबिटीज के अतिरिक्त अन्य कोई रोग भी डायबिटीज़ के मरीज को जकड़ लेता है। इस विषय पर विशेष चर्चा की बजाय आज हम आपको डायबिटीज के टाइप्स के बारे में बताने जा रहे हैं और सबसे विशेष चर्चा टाइप -2 की जरूरी है।


डायबिटीज को आमतौर पर शुगर की बीमारी कहा जाता है। जिसे हिंदी में मधुमेह के नाम से भी जाना जाता है। इसके दो टाइप होते हैं टाइप -1 व टाइप-2 डायबिटीज के इन दोनों टाइप्स के बारे में जानना अति आवश्यक है। तभी आप इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


टाइप-1 डायबिटीज
हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा पैंक्रियाज होता है, जिसमें कोशिकाओं के निर्माण में अवरोध उत्पन्न होने से कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। जिसकी वजह से शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। डायबिटीज के टाइप -1 लक्षणों को इलाज के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है, डायबिटीज का पहला टाइप अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी ने अपने रिसर्च में पाया कि टाइप-1 डायबिटीज होने का कारण रोटावायरस भी हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रोटावायरस की वैक्सीन का टीकाकरण बच्चों को डायबिटीज के टाइप-1 से बचाने के लिए 2007 से दिया जा रहा है।


टाइप -2 डायबिटीज
डायबिटीज का टाइप -2 किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक स्तर तक बढ़ जाता है। टाइप- 2 डायबिटीज होने के लिए शारीरिक दिनचर्या, आपके शरीर का मोटापा, आपकी लाइफस्टाइल स्टाइल बहुत हद तक जिम्मेदार होते हैं।


टाईप -2 डायबिटीज होने के लक्षण
टाइप -2 डायबिटीज से पीड़ितों को कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, इसमें बार-बार भूख लगना, पेशाब लगना, शरीर सुन्न पड़ना, प्यास लगना आदि। डायबिटीज बीमारी आपको परहेज करने के लिए मजबूर कर देती है। अगर आप खाने-पीने में दैनिक जीवन में परहेज नहीं करते तो शुगर मौत का कारण बन सकता है।


टाइप-1 किन लोगों को हो सकता है?
भारत में डायबिटीज का ये टाइप- 1 दो प्रतिशत से भी कम लोगों को होता है। टाइप-1 अधिकतर बच्चों या वृद्धावस्था में ढल चुके लोगों में हो सकता है। 4 से 19 वर्ष के आयु वर्ग में डायबिटीज के इस प्रकार को पाया जाता है।


टाइप-2 किन लोगों को हो सकता है?
डायबिटीज के प्रकार 40 से 45 की उम्र के व्यक्तियों में अधिकांशत: हो सकता है। टाइप टू डायबिटीज कई कारणों से हो सकती जैसे- शरीर में अन्य बीमारियां मोटापा, ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम इत्यादि। टाइप -2 की डायबिटीज हो जाने पर शरीर में बड़े बदलाव हो जाते हैं। चोट लगने पर घाव जल्दी ठीक नहीं होते हैं।


डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों को कई तरह के इलाज दिए जाते हैं। शरीर में मुख्यतः इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, जिसकी पूर्ति के लिए शरीर को इंसुलिन का डोज देना होता है। टाइप-2 डायबिटीज में तरीके से इलाज व दवाइयां लेने, परहेज करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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