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Depression Symptoms: Depression एक 'Silent Killer', इन लक्षणों को कमजोरी समझने की भूल न करें

By Healthy Nuskhe | Feb 25, 2026

आज के समय में मानसिक सेहत पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हाल के वर्षों में मेंटल हेल्थ से संबंधित कई तरह की दिक्कतें तेजी से बढ़ती हुई देखी गई हैं। बड़ी संख्या में युवा इसका शिकार हो रहे हैं। यह एक गंभीर विषय है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षणों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। वहीं हर बार लो फील करना डिप्रेशन नहीं होता है।

अवसाद या डिप्रेशन मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या है। ऐसा होने पर लगातार उदासी, सुस्ती लगने, काम में मन न लगने और निगेटिव विचारों के आते रहने की समस्या हो सकती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, जिसका समय पर इलाज होना जरूरी होता है। मानसिक सेहत के इस विकार का असर फिजिकल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है। डिप्रेशन के लक्षण, चिंता-तनाव जैसी समस्याओं से मिलते-जुलते हैं। ऐसे में इसका अंतर करना जरूरी होता है।

उदासी का मतलब डिप्रेशन नहीं

नौकरी छूट जाने, किसी प्रियजन की मृत्यु या किसी रिश्ते के टूटने पर निगेटिविटी और जीवन से संबंधित कई तरह की समस्याओं का अनुभव हो सकता है। लेकिन उदास होना डिप्रेशन होने जैसा नहीं है।

वहीं चिंता-तनाव की स्थिति अगर लंबे समय तक बनी रहती है, तो मस्तिष्क में रासायनिक बदलाव और कुछ अन्य परिस्थितियां डिप्रेशन के खतरे को बढ़ाने वाली होती है।

डिप्रेशन की पहचान

भूख न लगना और वजन कम होना।
पहले जिन एक्टिविटी में रुचि थी, उनमें अब रुचि न होना।
अधिक नींद आना या फिर सोने में परेशानी होना।
अक्सर उदास महसूस करना और समय के साथ इसके लक्षणों का बिगड़ने जाना।
एनर्जी की कमी या अधिक थकान महसूस करना।
खुद को बेकार या दोषी समझना।
मृत्यु या आत्महत्या का मन में विचार आना।
सोचने, निर्णय लेने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना।

इलाज है जरूरी

अगर आपको लंबे समय तक इस तरह की समस्या महसूस हो रही है, तो आपको मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। आप अपने किसी प्रियजन या मित्र से अपनी समस्याओं के बारे में बताएं। जिससे समय रहते स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके।

बता दें कि अवसाद एक गंभीर विकार है, तो आपके परिवार पर गंभीर निगेटिव असर डाल सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो डिप्रेशन बदतर हो सकता है। जिसके परिणामस्वरूप व्यवहारिक, भावनात्मक और शारीरिक सेहत संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
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