जोड़ों के दर्द से हैं परेशान कहीं आपको साइटिका तो नहीं, जानिए इसके लक्षण, बचाव और उपचार


जोड़ों के दर्द से हैं परेशान कहीं आपको साइटिका तो नहीं, जानिए इसके लक्षण, बचाव और उपचार

साइटिका को कटिस्नायुशूल नाम से भी जाना जाता है। साइटिका शब्द आमतौर पर तंत्रिका दर्द के लिए उपयोग किया जाता है। यह दर्द निचले हिस्से से फैला होता है और घुटनों की ओर विकिरण करता है। साइटिका अपना कब्जा नस से लेकर पीठ के निचले हिस्‍से से होते हुए एक या दोनों पैरों में दर्द से गहरी चपेट में ले लेता है। यह आमतौर पर तब होता है जब रीढ़ की हड्डी में हर्नियाग्रस्त डिस्क या हड्डी स्पर तंत्रिका पर दबाव डालती है।


साइटिका के लक्षण:- साइटिया में दर्द रीढ़ की हड्डी से पैर के पिछले तरफ बढ़ता जाता है। साइटिका शरीर के केवल एक पक्ष को प्रभावित करता है।


1 साइटिका में पीठ और कूल्हे पर बहुत दर्द होता है।
2 यह दर्द बैठने या चोट लगने के समय पर होता है।
3 इसका दर्द एक हिस्से से शुरू होकर चारो तरफ़ फैलने लगता है।
4 लोगों को चलने में परेशानी होती है साथ ही मांसपेशियों में भी कमज़ोरी हो जाती है।
5 साइटिका में लोगों को मांसपेशियों में चुभन महसूस होता हैं और उनका पांव सुन्न हो जाता हैं।
6 इस बीमारी में जलन होना और पांव सुन्न होना आम बात है।


साइटिका के कारण:- साइटिका रीढ़ से जुड़ी कई स्थितियों में हो सकता है। आइए जानते हैं इसके कुछ सामान्य लक्षण


स्लिप डिस्क होने के कारण:- अमेरिकन अकादमी आफ ऑर्थोपेडिक सर्जन के मुताबिक, यह अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक 50 लोगों में से एक को अपने जीवन काल में स्लिप डिस्क के दर्द की पीड़ा उठानी पड़ती है, यह साइटिका का प्रमुख कारण है।


स्पाइनल स्टेनोसिस:- इसमें रीढ़ की हड्डी के नीचे की नलिका का असामान्य संकुलन होता है और यह रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र पर दबाव डालते हैं जिसकी वजह से ऐसे लोग साइटिका से ग्रसित हो जाते हैं।


स्पोन्डयलोलिस्थेसिस:- इसमें एक रीढ़ की हड्डी एक दूसरे से आगे बढ़ती है इससे विस्तारित रीढ़ की हड्डी साइटिक तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है।


पीरिफोर्मिस सिंड्रोम:- यह एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर विकार हैं,जिससे साइटिका हो जाता हैं।


साइटिका से बचाव के 6 मुख्य मंत्र
1 खड़े होने, बैठने और चलने का सही आसन बनाए रखें।
2 नियमित व्यायाम करें और ऐसे व्यायाम करें जो आपकी रीढ़ की हड्डियों को मांसपेशियों को मजबूत बनाएं साथ ही एरोबिक फिटनेस भी करें।
3 किसी भी चीज को उठाते वक्त अपनों घुटनों को मोड़कर पीठ को सीधा करने की कोशिश करें।
4 बैठने के लिए कुर्सियों का प्रयोग करें और सुनिश्चित करें कि आपकी पीठ सही तरीके से टिकी हुई है। हमेशा ऐसी कुर्सियों का प्रयोग करें जो आपको अच्छा बैक सपोर्ट प्रदान करें।
5 धुम्रपान ना करें।
6 शरीर के वजन को एक स्तर पर बनाए रखें।


साइटिका का उपचार:- ध्यान रखें कि इसका उपचार आपकी गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर दर्द के लिए दवा और भौतिक चिकित्सा आम इलाज हैं। इसके लिए आप स्वयं की देखभाल करें, प्लावी बर्फपुंज और व्यायाम करें, आयुर्वेदिक उपचार की तकनीक, स्ट्रेचिंग, मालिश और एक्यूपंक्चर का उपयोग करें।


साइटिका के दर्द के लिए निर्धारित दवाएं
1 सूजन विरोधी दवाएं
2  स्नायु सिथिलता की दवाएं
3 नारकोटिक्स दवाएं
4 उव्देग विरोधी दवाएं आदि


स्टेरॉयड इंजेक्शन:- यह इंजेक्शन तंत्रिका के आस-पास सूजन को कम कर के दर्द को कम करने में सहायता करता है। इस इंजेक्शन का प्रयोग सीमित संख्या में ही किया जाता है क्योंकि जब इंजेक्शन लग से लगाए जाते हैं तो इसके दुष्परिणाम का खतरा बढ़ जाता है।


सर्जरी:- सर्जरी तब होती है जब पीड़ित का तंत्रिका तंत्र बहुत कमजोर हो जाता है, मूत्राशय पर कोई कंट्रोल नहीं होता और धीरे-धीरे दर्द कम होने की बजाय बढ़ता ही जाता है।


साइटिका की कुछ वैकल्पिक दवाएं

 
एक्यूपंक्चर:- इसमें  विशेषज्ञ आपकी त्वचा में बाल जैसी पतली  सुईयो से विशिष्ट बिंदुओ पर चुभोता है। कुछ अध्ययनों में एक्यूपंक्चर से दर्द को कम करने का दावा किया जाता है, जबकि कुछ अभियानों के अनुसार इसका कोई लाभ नहीं होता हैं।


चिरोप्रैक्टिक:- यह रीढ़ की हड्डी के अर्जेस्ट थेरेपी का एक प्रकार है, जो रीढ़  की गतिशीलता का इलाज करता है। इसका लक्ष्य रीढ़  की हड्डी  गतिविधियों को बहाल करके इन्फेक्शन में सुधार करना है।


साइटिका का आयुर्वेदिक उपचार:- साइटिका के आयुर्वेदिक उपचार में पहले जहरीले तत्व को खत्म करने वाली जड़ी बूटियां दी जाती थी। साइटिका को आयुर्वेद में गृध्रसी के रूप मे जानते थे। पहले साइटिक तंत्रिका को शांत करने के लिए औषधिक तेलों का भी प्रयोग किया जाता था जिसके मालिस से साइटिका के दर्द को कम किया जाता था।


आयुर्वेदिक दवाओं से साइटिया का उपचार

 
निर्गुण्डी:- यह जड़ी बूटी तंत्रिका और जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए प्रभावी है। इसका प्रयोग जलन और जोड़ों की सूजन को कम करने के लिए प्रयोग किया  जाता है। यह जड़ी बूटी  स्किन दर्द को कम करने में अधिक प्रभावशाली है।


गुग्गुलु:- गुग्गुलु जड़ी बूटी को सबसे पुरानी उपचारों में से एक माना जाता है इस जड़ी बूटी का प्रयोग पीठ के निचले हिस्सो के दर्द के लिए प्रयोग जाता है। यह जड़ी-बूटी पीठ की मांसपेशियों और ऊतकों पोषण देती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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