बढ़ती उम्र के साथ-साथ चावल-दाल खाना चाहिए या नहीं ? जानिए सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल का जवाब


बढ़ती उम्र के साथ-साथ चावल-दाल खाना चाहिए या नहीं ? जानिए सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल का जवाब

चावल और रोटी एक साथ खाने का चलन भारत में बहुत ज्यादा है। ज्यादातर लोग जब भी खाना खाते हैं तो चावल और रोटी एक साथ ही खाते हैं। लेकिन जब पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है या वजन घटाने की बात आती है तो लोग इस सवाल के बारे में जानना चाहते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो एक समय में चावल और रोटी खाना सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। यदि आप घर पर हैं साथ ही फिजिकल एक्टिविटी (physical activity) बहुत कम कर रहें है और उम्र बढ़ रही है, तब क्या आपको रोटी या चावल (Roti or rice) खाना कम कर देना चाहिए। जबकि भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा रोटी या चावल ही है। ये मैक्रोन्यूट्रीएंट्स (macronutrients) या कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) हमें दिन भर के लिए ऊर्जा (energy) प्रदान करते हैं। इसलिए हमारे हर मील में ये किसी न किसी रूप में उपस्थित रहते हैं। पर तब क्या करें जब आप अपने बढ़ते वजन के प्रति चिंतित हों। पोषण की आवश्‍यकता (nutritional needs) इंसान को फिट करने के लिए होती है। खानपान और फिटनेस का आपस में गहरा नाता है क्‍योंकि अगर हम संतुलित भोजन नहीं करेंगे तो हमारे शरीर में अनेक विकार और रोग जैसे मोटापा, मधुमेह, कैंसर तथा हृदय रोग अपनी जड़ें जमा लेंगे। इसलिए पोषक आहार किसी भी व्यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण है। यदि आपके शरीर को सही पोषण नहीं मिलेगा, तो यह सही तरीके से काम नहीं करेगा।  

उम्र बढ़ने के साथ-साथ वज़न घटाने के लिए कम से कम दाल-चावल (Dal rice) खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि व्हाइट चावल से फैट बढ़ता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए ब्राउन चावल का इस्तेमाल किया जाए। वहीं दाल तो शरीर के लिए प्रोटीन का सोर्स होती हैं। तो ऐसे में कोशिश करें की दालें भी एक सीमा के भीतर खाएं क्योंकि कई दालें पेट में कब्ज भी बनाती हैं। ऐसे में अपनी डाइट में दाल-चावल इस्तेमाल करने वाले लोग ध्यान दें। वहीं हो सके तो रोटी रात के वक्त में कम कर देनी चाहिए, सुबह के वक्त में थोड़ा हेवी नाश्ता लेना चाहिए।

हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट

वजन कंट्रोल करने और एनर्जेटिक बने रहने के लिए एक सही-संतुलित आहार लेना बहुत ज़रूरी हैं। उनके अनुसार इसमें जिन पोषक तत्वों का होना जरूरी है, वे इस प्रकार हैं –

1. कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates)

ये शरीर के विभिन्‍न भागों, अंगों और ऊतकों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके स्रोत हैं – ब्रैड, गेंहूं और शुगर। कार्बोहाइड्रेट कितनी मात्रा में लेना चाहिए यह शरीर के वज़न, ऊर्जा की आवश्‍यकता और खेल-कूद के लिए आवश्‍यक मैटाबोलिक मांग पर निर्भर करता है। कार्बोहाइड्रेट के सेवन से परफॉर्मेंस बढ़ती है और थकान दूर होती है। अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अनाज, बाजरा, अपरिष्‍कृत कार्बोहाइड्रेट लेने की सलाह दी जाती है।

2. प्रोटीन (Protein)

यह मांसपेशियों को बनाने में मदद करने के साथ-साथ मस्तिष्‍क तथा शरीर के अन्‍य भागों के लिए ऊर्जा का स्रोत है। साथ ही, शरीर के ऊतकों (tissue) की मरम्‍मत के लिए भी इनकी आवश्‍यकता होती है। जो खिलाड़ी एन्‍ड्योरेंस, स्‍ट्रैन्‍थ और अन्‍य प्रकार के स्‍पोर्ट्स से जुड़े होते हैं, उन्‍हें प्रोटीन की आवश्‍यकता अधिक होती है। सामान्‍य व्‍यक्ति को 1 ग्राम/किलोग्राम प्रोटीन की आवश्‍यकता होती है, लेकिन ज्‍यादा परिश्रम करने वाले व्‍यक्ति के शरीर में यह मात्रा 2 ग्राम/शरीर के वज़न तक बढ़ सकती है। खिलाड़‍ियों को अच्‍छा प्रदर्शन करने के लिए अच्‍छी क्‍वालिटी के प्रोटीन की जरूरत होती है। दाल, बीन्‍स, अंडे का सफेद भाग, चिकन के पतले टुकड़े, मछली, सोया, टोफू, स्किम्‍ड मिल्‍क और उससे बने उत्‍पाद प्रोटीन के अच्‍छे स्रोत होते हैं। अच्‍छी सेहत के लिए साबुत दाल और अन्‍य दालों का सेवन करना चाहिए।

3. वसा/फैट (Fat)

यह ऊर्जा का अच्‍छा स्रोत होता है। वसा में घुलनशीन विटामिनों के मैटाबोलिज्‍़म के लिए इसकी आवश्‍यकता होती है। वसा से भोजन में स्‍वाद और तृप्ति मिलती है। फैट के स्रोतों में तेल, मक्‍खन, मेवे तथा बीज आदि शामिल हैं। अच्‍छी परफॉरमेंस के लिए सैचुरेटेड फैट्स से बचना चाहिए। इनकी बजाय अनसैचुरेटेड फैट्स जैसे कि अलसी के बीज (Flax seeds), मछली, मेवे आदि का सेवन करना चाहिए।

4. विटामिन और मिनरल्स (Vitamin and minerals)

विटामिन और खनिज पदार्थ वसा, प्रोटीन और कार्बो‍हाइड्रेट के लिए उत्‍प्रेरक की तरह होते हैं। इसलिए भोजन में ताजे फल और मौसमी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। विटामिन और मिनरल्‍स हमारे शरीर के लिए सुरक्षा कवच की तरह होते हैं। क्‍योंकि इनमें फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट्स तथा कैरोटेनॉयड्स मौजूद होते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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